राष्ट्रीय - CBI ने कहा- रेड काॅर्नर नोटिस के बिना भी हो सकता है मेहुल चैकसी का प्रत्यर्पण

CBI ने कहा- रेड काॅर्नर नोटिस के बिना भी हो सकता है मेहुल चैकसी का प्रत्यर्पण



Posted Date: 27 Aug 2018

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नई दिल्ली। पीएनबी घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि भारत बिना इंटरपोल आरसीएन के भी भगोड़े अरबपति मेहुल चैकसी के प्रत्यर्पण की कोशिश कर सकता है, क्योंकि इस प्रक्रिया के लिए यह कोई अनिवार्य जरूरत नहीं है। इसी शुरूआती माह में मंत्रालय को पत्र लिखकर सीबीआई ने कहा कि (आरसीएन) का उद्देश्य फरार आरोपी के ठिकाने को पता लगाना होता है, जो चोकसी के मामले में पहले ही हो चुका है। क्योंकि एंटीगुआ पुष्टि कर चुका है कि वह उसका नागरिक है। ऐसे में आरसीएन के कोई मायने नहीं रह जाते।

जांच एजेंसी ने कहा कि आरसीएन का अब कोई विशेष महत्व भी नहीं है। क्योंकि एंटीगुआ उसे नागरिकता दे चुका है और चोकसी अब एंटीगुआ का पासपोर्टधारक है।

उसने मंत्रालय को यह भी बताया कि चैकसी के अंतरिम गिरफ्तारी की मांग करते हुए एंटीगुआ ने अपने समकक्ष को पत्र भी लिखा है। चोकसी पंजाब नेशनल बैंक में दो अरब डाॅलर से अधिक की ऋण धोखाधड़ी में कथित मुख्य षडयंत्रकर्ता है।

पत्र में यह भी कहा गया कि ‘एंटीगुआ अधिकारियों की यह दलील कि केवल आरसीएन जारी कर रही चोकसी की आवाजाही रोकी जा सकती है। कानूनी रूप से पुख्ता नहीं है क्योंकि संबंधित व्यक्ति का ढ़ूढ़ने का प्राथमिक उद्देश्य पूरा हो चुका है।

अधिकारियों ने कहा, अंतरिम गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के लिए अगला कदम अब एंटीगुआ को लेना होगा और उसके लिए आरसीएन की कोई पूर्व जरूरत नहीं है।

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बता दें चैकसी ने इंटरपोल से रेड काॅर्नर नोटिस जारी नहीं करने की अपील की थी। उसने खुद पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उसका यह भी कहना है कि भारत में जेलों की दशा अच्छी नहीं है और वहां ठहरना उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा।

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अपराध में अपने भांजे नीरव मोदी के कथित पार्टनर चोकसी ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ आरोपों को मीडिया ने बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया। भारत में उसके मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती है क्योंकि अदालतें खबरों से प्रभाव में आ सकती हैं।


BY : Abdul Mannan


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