अंतरराष्ट्रीय - शोध से हुआ खुलासा, अधिक शारीरिक मेहनत करने वाले जीव आलसियों के मुकाबले जीते हैं कम

शोध से हुआ खुलासा, अधिक शारीरिक मेहनत करने वाले जीव आलसियों के मुकाबले जीते हैं कम



Posted Date: 24 Aug 2018

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लंदन। चार्ल्स डार्विन का मत था कि प्रकृति क्रमिक परिवर्तन द्वारा अपना विकास करती है। विकासवाद कहलाने वाला यही सिद्धांत आधुनिक जीव विज्ञान की नींव बना। डार्विन को इसीलिए इतिहास का सबसे बड़ा वैज्ञानिक माना जाता है। डार्विन के सवाईवेल आॅफ द फिटेस्ट सिद्धांत के वैज्ञानिको ने समुंद्री जीवों पर कई खोजें की हैं जिससे उन्हें सफलता मिली। इसी क्रम में चाल्र्स डार्विन के सवाईवेल आॅफ द फिटेस्ट सिद्धांत के उलट वैज्ञानिकों ने एक नई खोज की है। कुछ समुंद्री जीवों पर रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया कि जो प्रजातियां रोजमर्रा की जिन्दगी में ज्यादा ऊर्जा खर्च करती हैं वे कम ऊर्जा खर्च करने वाले अपने समकक्षों के मुकाबले आलसी ज्यादा जीते हैं। 

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में करीब 299 अलग-अलग समुंद्री जीवों को शामिल किया। इनमें सबसे ज्यादा ऊर्जा खर्च करने वाले समुंद्री घोंघे और सीप भी रखे गए।

बता दें रिसर्च में पाया गया कि ज्यादा ऊर्जा खर्च करने की जगह से इन जीवों का मेटाबाॅल्जिम (चयापचय) तेज था। जबकि कम ऊर्जा खर्च करने वालों का मेटाबाॅल्जिम काफी कम था।

कंसास यूनिवर्सिटी में बायोलाॅजी के प्रोफेसर ब्रूस लिबरमैन के मुताबिक, मेटाबाॅल्जिम जितना धीमा होगा, जीने की क्षमता उतनी ही ज्यादा होगी।

दरअसल, कम ऊर्जा खर्च करने वालों को खाने के लिए कम ऊर्जा की ज़रूरत होती है। ऐसे में वे मुश्किल से मुश्किल हालात में वे आसानी से जीवित रह सकते हैं। इससे उलट ज्यादा ऊर्जा खर्च करने वालों को मुश्किल हालात में भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है और अगर इसकी पूर्ति न हो तो वे कमजोर होकर जल्द मर जाते हैं।

बता दें कि प्रोसिडिंग्स आॅफ राॅयल सोसाइटी बी में छपे इस रिसर्च के जरिए संरक्षणकर्ता अब जल्द पता लगा सकते हैं कि कौन से जीव जलवायु परिवर्तन की वजह से जल्द खत्म हो सकते हैं।

दुनियाभर में लगातार बढ़ रही जलवायु की वजह से कई जीवों का भोजन खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में ज्यादा ऊर्जा लगाने वाले जीवों पर पहले लुप्त होने का खतरा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अब वे इस पर रिसर्च करेंगे कि जमीन पर रहने वाले जानवर और मनुष्यों पर भी ये नियम लागू होता है या नहीं ?

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि रिसर्च का यह मतलब बिल्कुल नहीं कि आलसी लोग स्वस्थ होते हैं।

 

 


BY : Abdul Mannan


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