राष्ट्रीय - मेक इन इंडिया को लेकर छलका स्वदेशी कंपनियों का दर्द, कहा- इससे विदेशी कंपनियों को लाभ हो रहा

मेक इन इंडिया को लेकर छलका स्वदेशी कंपनियों का दर्द, कहा- इससे विदेशी कंपनियों को लाभ हो रहा



Posted Date: 27 Aug 2018

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नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी मेक इन इंडिया योजना स्वदेशी कंपनियों को कुछ खास नहीं लुभा रही है। इन कंपनियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि मेक इन इंडिया का लाभ स्वदेशी नहीं बल्कि विदेशी कंपनियों को अधिक हो रहा है। इन स्वदेशी कंपनियों की शिकायत है कि सरकार विदेशी कंपनियों पर नकेल कसने के देशी कंपनियों को ही नोटिस थमाकर उन पर लगाम लगाने का प्रयास कर रही है।

जानिए क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के संयोजक राजीव नाथ के अनुसार, बीते वर्ष कुछ अस्पतालों की ओर से कंज्यूमेबल पर दो हजार गुणा तक मुनाफा लेने का मामला सामने आने के बाद देशी निर्माताओं ने स्वयं ही इनका मूल्य निर्धारण कर कीमतों में कमी लाने का फैसला किया था।

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देशी सिरिंज कंपनियों ने अपने कुल निर्माण खर्च पर 75 प्रतिशत मुनाफा लेने का फैसला कर नए दरों पर सिरिंज उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया था। लेकिन विदेशी निर्माताओं ने इसे नकार दिया। इसके अलावा मंत्रालय ने भी विदेशी कंपनियों का साथ देते हुए मामले पर स्वदेशी कंपनियों को ही नोटिस जारी करना शुरु कर दिया। आपको बता दें कि पिछले वर्ष अस्पतालों में लाखों के बिल और महंगे सिरिंज का मामला गरमाया था।

राजीव नाथ के अनुसार, मेडिकल डिवाइसों को लेकर भी ऐसा ही हो रहा है। हाल ही में सरकार ने इनकी गुणवत्ता और कीमत निर्धारण की प्रक्रिया की शुरुआत की थी। सभी स्टॉक होल्डरों से सुझाव भी मांगा गया था। इस पर देशी कंपनियों ने निर्माण के कुल लागत पर 65 प्रतिशत मुनाफे का सुझाव दिया था। उनका कहना है कि इस बाबत 22 अगस्त को नीति आयोग ने सरकार को इसके साथ ही दो और सुझाव दे दिए। इसमें विदेशी कंपनियों को ध्यान में रखकर आयात में डीलर को मिले मूल्य पर मुनाफा तय करने की बात की जा रही है। ऐसे में स्वदेशी कंपनियों के मुकाबले में अपने ही देश में विदेशी कंपनियों को ज्यादा तव्वजों मिलने से ये देशी कंपनियां मेक इन इंडिया का फंडा समझ नहीं पा रहीं हैं।

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जानकारी के अनुसार सरकार इसी सुझाव को लागू करने का मन बना रही है। जाहिर सी बात है कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान उपभोक्ताओं को होगा। उनका कहना है कि सरकार की ऐसी नीतियां देश में चल रही महज 800 मेडिकल डिवाइस निर्माता कंपनियों को बंद कराने का काम करेंगी।


BY : INDRESH YADAV


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