विशेष - जिन्होेंने भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में अपनी कविता के दम पर बनाई एक अलग फिज़ा

जिन्होेंने भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में अपनी कविता के दम पर बनाई एक अलग फिज़ा



Posted Date: 31 Aug 2018

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कश्मीरी लाल ज़ाकिर प्रख्यात कवि, उपन्यासकार और लघुकथा लेखक थे। ये हरियाणा उर्दू अकादमी के निदेशक भी थे। भारत ही नहीं बल्कि इनकी रचानाएं पाकिस्तान में भी लोकप्रिय हुईं। उन्होनें उूर्द, हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में 100 से ज्यादा किताबें लिखीं। वो हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बंग्लादेश में उर्दू के सबसे वरिष्ठ लेखक थे। साहित्य के क्षेत्र में उन्हें पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कश्मीरी लाल जाकिर जी का जन्म 7 अप्रैल 1999 को पाकिस्तान में हुआ। वो अंग्रेजी शिक्षा में स्नातकोत्तर थे। उनकी रचनाएं उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं।

1940 के दशक में उन्होेंने लिखना शुरू किया। 8 दशक तक उर्दू और हिंदी साहित्य को अपना योगदान दिया। उन्होनें उर्दू की खिदमत 70 सालों तक की। उन्होनें उर्दू, हिंदी, पंजाबी और अंगे्रजी में 100 से ज्यादा किताबें लिखीं।

बता दें जाकिर लंबे समय तक हरियाणा के शिक्षा विभाग और बाद में चंडीगढ़ प्रशासन के शिक्षा विभाग में सेवारत रहे। ब्रिटिश इंडिया के समय में उन्होंने पंजाब एजुकेशन डिपार्टमेंट में नौकरी की।

वहीं उनके उपन्यास ‘करमांवाली’ की बात करें तो उस पर नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा ने 100 से ज्यादा नाटक खेले। बाद में इसे दूरदर्शन ने भी धारावाहिक बनाया। उनके लेख पहली बार लाहौर की एक मैगजीन में छपे थे।

जाकिर को पदमश्री के अलावा राष्ट्रीय गालिब पुरस्कार, शिरेमणि साहित्यकार सम्मान, एनएलएम यूनेस्को, साहिर लुधियानवी और फख्र-ए-हरियाणा जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों अम्बाला हो या करनाल, पंचकुला हो या चंडीगढ़, पटियाला, अखिल भारतीय उर्दू मुशायरे की परंपरा के सूत्रधार कश्मीरी लाल ज़ाकिर ही हुआ करते थे। 97 वर्ष की अवस्था में 31 अगस्त 2016 को चंडीगढ़ के अस्पताल में इनका निधन हो गया।


BY : Abdul Mannan


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