राष्ट्रीय - ये खबर अगर योगी आदित्यनाथ सुबह पढ़ लेते तो शायद नोएडा न आते

ये खबर अगर योगी आदित्यनाथ सुबह पढ़ लेते तो शायद नोएडा न आते



Posted Date: 09 Mar 2019

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लखनऊ। खबर उसी शहर से है जहां प्रदेश के सबसे बड़े गौरक्षक स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जन-कल्याणकारी योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं। इस शहर की गायों की स्थिति अगर सीएम जान लेते तो शायद आज के कार्यक्रम में एक-आधी योजनाएं गायों के लिए भी शुरू हो जातीं।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की एक गौशाला में पिछले दो महीनों में 200 गाय मर गईं। इन गायों के मरने की वजह कोई पशु महामारी नहीं बल्कि छोटी बीमारियों के इलाज का अभाव और पर्याप्त चारे का इंतज़ाम न होना है। बता दें कि इसी ग्रेटर नोएडा में आज सीएम और पीएम कई सार्वजनिक कार्यक्रम कर रहे हैं।

अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 इलाके में स्थित जलपुरा गांव में गऊलोक नामक एक गौशाला है। यह गौशाला 9 एकड़ इलाके में फैली है और दशक भर पहले ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट अथॉरिटी ने इसकी शुरुआत की थी। फिलहाल यह गौशाला GNIDA और GoRas Foundation नामक एक एनजीओ के साथ मिलकर चलाई जा रही है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने आदेश दिया था कि सड़कों पर आवारा घूम रहीं गायों को शेल्टर्स तक पहुंचाया जाए। इस आदेश का पालन GNIDA ने प्राथमिकता से किया और इस गौशाला में करीब 800 गाय भेज दीं। अब यहां गायों की संख्या 1200 तक पहुंच गई। अब जो खबरें आ रहीं हैं उनके अनुसार यहां पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं और चारा न होने के कारण गायों के मरने की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

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गौशाला के कर्मियों का कहना है कि गौशाला में 26 लोगों का स्टाफ है, जो गायों की अच्छी तरह से देखभाल करता है। चूंकि अधिकतर गाय आवारा है, इसलिए जब उन्हें शेल्टर में लाया जाता है तो वह अन्य गायों के साथ झगड़े में घायल हो जाती हैं, साथ ही कई गाय लंबे समय से बीमार भी हैं।

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कर्मचारियों के अनुसार गायों की मरने की वजह पर्याप्त चारा न होना है। जबकि GNIDA ने इस बात से इंकार किया है। उनका कहना है कि गायों के मरने का कारण प्राकृतिक है। GNIDA की ओर से गायों की देखभाल और चेकअप कराया जाता है और साथ ही गौशाला को 5 लाख रुपए फंड के रूप में भी दिए जाते हैं।


BY : Yogesh




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