राष्ट्रीय - AMU छात्रसंघ ने बुलंद की ‘जमात-ए-इस्लामी’ पर बैन के खिलाफ आवाज, कहा- फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार

AMU छात्रसंघ ने बुलंद की ‘जमात-ए-इस्लामी’ पर बैन के खिलाफ आवाज, कहा- फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार



Posted Date: 08 Mar 2019

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर के ‘जमात-ए-इस्लामी’ संगठन पर लगे बैन को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ ने विरोध प्रकट किया। साथ ही यह भी डिमांड की कि इस बैन को लेकर केंद्र सरकार को पुनर्विचार करने की जरूरत है। उनका कहना है कि जमात एक ‘सामाजिक-धार्मिक-राजनीतिक’ संगठन है। जिसने साल 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ के दौरान बढ़-चढ़ कर पीड़ित लोगों की मदद के लिए अपना हाथ बढ़ाया था। साथ ही साल 2005 में आई बाढ़ के वक्त भी शानदार प्रदर्शन किया था। अतः इस संगठन का ना तो आतंकी गतिविधियों से कोई सरोकार है ना ही ये किसी गैरकानूनी काम में लिप्त है। ऐसे में इस तरह का कदम उठाया जाना कट्टर हिंदुत्व की राजनीति का प्रमाण देता है।

खबरों के मुताबिक़ छात्रसंघ अध्यक्ष एम सलमान इम्तियाज की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस ‘सामाजिक-धार्मिक-राजनीतिक’ संगठन पर लगा प्रतिबंध एक ‘झटके’ सरीखा है।

बता दें छात्रसंघ अध्यक्ष ने अपने बयान में बीजेपी पर ‘हिंदुत्व की राजनीति’ करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बीजेपी का शासन खत्म ही होने वाला है और चुनाव के लिए अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं, ऐसे में जमात पर लगे बैन के फैसले का गैरकानूनी गतिविधियों से कोई सबंध नहीं है।

उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा उठाया गया यह कदम महज कट्टर हिंदुत्व की राजनीति से जुड़ा हुआ है। वहीं कश्मीर में धार्मिक नेतृत्व, सिविल सोसायटी से लेकर व्यापारियों तक ने इस प्रतिबंध को राजनीति से प्रेरित बताया है।

एएमयू छात्रसंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह जमात पर लगाए प्रतिबंध की वजह से लग रहे आरोपों पर सफाई दे।

वहीं दूसरी ओर अलीगढ़ के बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने कहा कि एएमयू ‘देश विरोधी गतिविधियों का केंद्र’ बन गया है। सलमान इम्तियाज के मुताबिक, यह संगठन संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है।

बयान में कहा गया, ‘जमात न तो अंडरग्राउंड संगठन और न ही आतंकी संगठन। यह राज्य के चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। 1989 में चुनाव में बड़े पैमाने पर हुई धांधलियों के बाद जमात ने चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया।’

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वहीं एक अंग्रेजी समाचार पत्र से बातचीत में इम्तियाज ने कहा कि सरकार को बैन का मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘संकट काल में जमात की निभाई गई भूमिका पर सरकार को विचार करना चाहिए। 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ के वक्त, संगठन ने मदद करने की दिशा में शानदार काम किया। संगठन ने राज्य में 2005 में आई बाढ़ के दौरान भी शानदार काम किया।

उन्होंने कहा कि यह संगठन डेमोक्रेसी में भरोसा करता है और उसने साफ किया है कि उसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है। हमें कश्मीर के लिए कठोर नहीं, एक समावेशी नीति की आवश्कयता है।

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BY : Ankit Rastogi




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