राष्ट्रीय - टिस की रिपोर्ट में खुलासा: बिहार के लगभग सभी शेल्टर होम में बच्चे हो रहें भूख और मौखिक प्रताड़ना का शिकार

टिस की रिपोर्ट में खुलासा: बिहार के लगभग सभी शेल्टर होम में बच्चे हो रहें भूख और मौखिक प्रताड़ना का शिकार



Posted Date: 27 Jul 2018

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बिहार सरकार द्वारा टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि बिहार के बिहार के बाल आश्रय गृहों में बच्चों को भूख, अलगाव तथा मौखिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता हैंं।

टिस ने जांच पड़ताल के दौरान पाया कि बालगृहों में अधिकांस 3 साल के बच्चे बोलते ही नहीं है क्योंकि केन्द्रों में कोई प्रशिक्षण संस्थान ही नहीं हैं। इस वजह से बच्चे कुछ सिख नहीं पाते है। वहीँ रिपोर्ट ने बच्चों द्वारा गाली देने का भी जिक्र है। टिस ने इस मुद्दे पर ये यह तर्क रखा कि वहां के कर्मचारी बच्चों को गाली देते है, बच्चे जो सुनते है वही बोलते हैं। टिस की जिस रिपोर्ट में बिहार के आश्रय गृहों में यौन उत्पीड़न के मामलों का खुलासा हुआ था, उसमें ऐसे बच्चों को दी जाने वाली सजाओं के तरीकों को भी बताया गया है जिनमें कुछ अनाथ हैं, कुछ भागे हुए हैं और कुछ ऐसे हैं जिन्हें परिवारों ने छोड़ दिया है।

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रिपोर्ट के अनुसार, इन केंद्रों पर बच्चों को बाथरूम में बंद कर देने, उनसे उठक-बैठक कराने, अलग-थलग करने, अपशब्द बोलने जैसी बातें देखी गईं।

टिस टीम की अगुवाई कर रहे मोहम्मद तारिक ने बताया कि बच्चों पर इसका गलत प्रभाव पड़ता हैं। उन्होंने कहा कि बाथरूम में बंद कर देने से इन बच्चों के मानसिकता पर असर पड़ता है।

रिपोर्ट ने केंद्रों पर मेडिकल सुविधाओं के अभावों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लापरवाही या कर्मचारियों की कमी के कारण किसी बच्चे को दो बार दवाई दे दी गई या दवा दी ही नहीं गई। इससे जान पर खतरा भी हो सकता है।

रिपोर्ट में खासतौर पर तीन एसएए केंद्रों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई हैंं। इनमें पटना का नारी गुंजन, मधुबनी का आरवीईएसके और कैमूर का ज्ञान भारती हैं।

बता दे कि सरकार 6 साल तक की उम्र के लावारिस और लापता बच्चों को रखने के लिए इन विशेष केंद्रों को चलाती है जिन्हें स्पेशलाइज्ड एडोप्शन एजेंसीज (एसएए) कहा जाता हैं। बिहार के 20 जिलों में 21 एसएए हैं।

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BY : ANKIT SINGH


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