कारोबार - बनेगा नोटबंदी जैसा माहौल या जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ? तय करेगा सरकार का ये कदम

बनेगा नोटबंदी जैसा माहौल या जेब पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ? तय करेगा सरकार का ये कदम



Posted Date: 10 Feb 2019

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नई दिल्ली। एक बार फिर आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ आ सकता है। कारण है नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई)। दरअसल एनपीसीआई ने केंद्र सरकार के पास एक प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव है एटीएम से ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज फीस बढ़ाना। यदि सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी तो एटीएम से पैसा निकालना महंगा हो जाएगा।

खबरों के मुताबिक बिजनेस स्टैण्डर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक एनपीसीआई का कहना है कि अगर सरकार ने इंटरचेंज फीस बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी, तो फिर देश भर में एक लाख से अधिक एटीएम बंद हो जाएंगे, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। 

वहीं इस बाबत कॉनफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (कैटमी) ने कहा कि एटीएम कंपनियां धीरे-धीरे इनकी संख्या में कमी कर रही हैं, क्योंकि इनको चलाने में घाटा हो रहा है। अभी फिलहाल छोटे शहरों में एटीएम को बंद किया जा रहा है। ऐसे में एटीएम के बंद होने से इन शहरों में नोटबंदी जैसे हालात पैदा हो जाएंगे।  बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा नुकसान व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर्स को हो रहा है और ये अतिरिक्त घाटा नहीं उठा सकते हैं। इनके लिए एटीएम इंटरचेंज ही आय का साधन है। ये स्थिर है।

कैटमी के मुताबिक अगर बैंकों ने उनकी लागत की भरपाई नहीं की तो बड़े पैमाने पर कांट्रैक्ट सरेंडर होंगे इस कारण कई एटीएम बंद हो जाएंगे। 

बता दें एनपीसीआई ने इंटरचेंज फीस को 15 रुपये से 17 करने का प्रस्ताव दिया है। इंटरचेंज फीस एनपीसीआई की स्टीयरिंग कमेटी तय करती है। इसमें प्रमुख रूप से बैंक के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। हालांकि इस कमेटी में एक राय नहीं बनी, जिसके बाद एनपीसीआई ने इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया है। 

ध्यान देने वाली बात यह है कि एटीएम इंटरचेंज फीस पिछले 6 साल से नहीं बढ़ी है। यह एटीएम से प्रति ट्रांजैक्शन पर आने वाली लागत से भी कम है। ऐसे में इंटरचेंज फी बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं इंटरचेज फी का भुगतान करने वाले बैंक इसमें इजाफा नहीं चाहते हैं। अधिकारी का कहना है कि अगर इंटरचेंज फी नहीं बढ़ाया जाता है तो इसमें नियामक को हस्तक्षेत करना चाहिए।

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वहीं कॉनफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (कैटमी) के निदेशक हिमांशु पुजारा ने एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान बताया कि एटीएम बंद होने से हजारों लोगों की नौकरी जाएगी, साथ ही सरकार के वित्तीय समावेशन करने के इरादे को भी झटका लगेगा। एटीएम सेवा देने वाली कंपनियों को मार्च 2019 तक करीब 1.13 लाख एटीएम बंद करने पड़ सकते हैं। इसमें 1 लाख ऑफ साइट एटीएम और 15 हजार व्हाइट लेबल एटीएम हैं।

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BY : Ankit Rastogi




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