राजनीति - लोकसभा चुनावों से पहले बढ़ीं भाजपा की मुश्किलें, केंद्र के इस कदम के आगे रोड़ा बन खड़े हुए दो ‘अपने’

लोकसभा चुनावों से पहले बढ़ीं भाजपा की मुश्किलें, केंद्र के इस कदम के आगे रोड़ा बन खड़े हुए दो ‘अपने’



Posted Date: 07 Feb 2019

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। एनडीए में भाजपा की सहयोगी रही पार्टी शिवसेना ने एक बार फिर भाजपा के विरोध में अपने सुर बुलंद कर दिए हैं। शिवसेना ने इस बात का ऐलान किया है कि नागरिकता संशोधन बिल का वह पुरजोर विरोध करेगी। इस बात का खुलासा शिवेसना संसदीय दल के नेता सजंय राउत ने किया।

उनका कहना है कि यदि केंद्र की मोदी सरकार इस बिल को राज्यसभा में लेकर आई तो भाजपा को उनकी पार्टी के विरोध का सामना करना होगा।

वहीं इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड मुखिया नीतीश कुमार ने भी इस बात की घोषणा की थी कि वे भाजपा के इस कदम में उनका साथ नहीं देंगे। साथ ही यह भी कहा था कि उच्च सदन में इस बिल के खिलाफ वे अपना विरोध दर्ज करेंगे।

इस तरह शिवसेना एनडीए का ऐसा दूसरा दल बन जाता है, जो नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ दीवार बनकर भाजपा के रास्ते में खड़ा है।

खबरों के मुताबिक़ शिवेसना संसदीय दल के नेता सजंय राउत ने बुधावर (6 फरवरी, 2019) को एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान इस बात की जानकारी दी।

राउत ने कहा कि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा और क्षेत्र के कई दलों के नेताओं ने उनसे इस मुद्दे पर समर्थन करने के लिए मुलाकात की। पूर्वोत्तर के दस दलों ने विधेयक का विरोध करने के लिए समझौता किया है।

बिल का विरोध करते हुए संजय राउत ने कहा, ‘यह बिल राजनीतिक है, जिसका उद्देश्य भाजपा के चुनावी हितों की सेवा करना है।’

बताया जा रहा है कि पूर्वोत्तर के युवा नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल जल्द ही मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिलने वाला है।

जानना चाहिए कि नागरिकता बिल आठ जनवरी को लोकसभा में पास हो चुका है और इस दौरान कांग्रेस वॉकआउट कर गई।

बता दें संशोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के छह अल्पसंख्यक समूहों से जुड़े प्रवासियों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए बाधाओं को दूर करने का प्रावधान है।

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वहीं वर्तमान में 15 विपक्षी पार्टियों सहित राज्य सभा में कम से कम 114 सदस्य ऐसे हैं जिनके विधेयक के विरोध में वोट डालने की संभावना है। विपक्षी दलों में कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीडीपी और आरजेडी शामिल हैं। इसके अलावा एनडीए के दस सदस्य, जेडीयू के छह, शिवसेना के तीन और नागा पीपुल्स फ्रंड के एक सदस्य विपक्ष के साथ जाने को तैयार हैं। ऐसे में 245 सीटों वाली राज्य सभा में बिल के विपक्ष में मतदान करने वाले सदस्य के संख्या 124 हो जाएगी।

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BY : Ankit Rastogi




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