विशेष - बुर्गुला रामकृष्ण राव : उत्तर प्रदेश के राज्यपाल तथा तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री जिन्होंने निभाई भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका

बुर्गुला रामकृष्ण राव : उत्तर प्रदेश के राज्यपाल तथा तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री जिन्होंने निभाई भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका



Posted Date: 13 Mar 2019

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13 मार्च, 1899 को जन्में बुर्गुला रामकृष्ण आंध्र प्रदेश के राजनैतिक नेता थे। वह 6 मार्च, 1952 से 31 अक्टूबर, 1956 तक हैदराबाद राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने हैदराबाद के विकास का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख नेताओं में वह एक थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के राज्यपाल भी रहे। इसके अलावा वह तेलंगाना राज्य के पहले मुख्यमंत्री भी थे और तेलंगाना आंदोलन के प्रमुख नेता भी रहे।

आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में जन्में बुर्गुला रामकृष्ण एक संपन्न मध्यमवर्गीय परिवार से थे। 1923 में उन्होंने पूना के फर्ग्यूसन कॉलेज और मुंबई विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1924 में हैदराबाद में वकालत शुरु की।

बुर्गुला रामकृष्ण राव हैदराबाद सामाजिक सम्मेलन के सचिव रहे तथा हैदराबाद सुधार समिति एवं हैदराबाद राजनैतिक सम्मेलन के सदस्य रहे। 1938 में उन्हें राज्य कांग्रेस का कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया। 1937 में वह प्यूपिल्स कंवेशन के सचिव निर्वाचित हुए। वह तीन वर्षों तक आन्ध्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।

उन्होंने अंग्रेज़ो भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रुप से भाग लिया और कई बार जेल गये। आंध्र प्रदेश सरकार में वह 1950 से 1952 तक राजस्व एवं शिक्षामंत्री रहे। 1952 से 1956 तक वह हैदराबाद राज्य के मुख्यंत्री रहे।

भौगोलिक रुप से तेलंगाना 114,840 वर्ग किलोमीटर में फैला एक ऐसा क्षेत्र है जो साल 1948 तक निज़ाम राज का हिस्सा था। हैदराबाद के भारत विलय के बाद निज़ाम के तीन टुकड़े कर दिए गए। एक टुकड़े को कर्नाटक और दूसरे को महाराष्ट्र में मिला दिया गया। तीसरे टुकड़े को अलग तेलंगाना राज्य बना दिया गया। यह टुकड़ा तेलंगी या तेलुगु भाषी क्षेत्र था। बुर्गुला रामकृष्ण राव तेलंगाना राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे।

नेहरु सरकार की ओर से राज्यों के पुनर्गठन के लिए बैठाए गए फज़ल अली कमीशन ने तेलंगाना को एक अलग राज्य बनाए रखने की सिफारिश की थी। वैसे आंध्र क्षेत्र के नेताओं का दबाव था कि तमाम तेलुगुभाषी लोगों के लिए आंध्र, रायलसीमा और तेलंगाना को मिलाकर एक ही राज्य बनाया जाए। केंद्र ने यह बात स्वीकार कर ली।

और तेलंगाना राज्य 1 नवंबर 1956 को ख़त्म हो गया जबकि केंद्र सरकार ने तीनों क्षेत्रों को मिलाकर आंध्र प्रदेश राज्य का गठन किया। मगर तेलंगाना के लोग कभी अपने इस विलय को स्वीकार नहीं कर पाए। और 2013 में फिर से तेलंगाना राज्य का गठन हो गया।

बुर्गुला रामकृष्ण को 1956 में केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया और वह इस पद पर 1960 तक रहे। उसके बाद 1 जुलाई, 1960 को उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया और वह 15 अप्रैल 1962 तक इस पद पर कार्यरत रहे। 15 सितंबर 1967 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए।


BY : Saheefah Khan




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