राजनीति - गडकरी को मात देने के लिए कांग्रेस इस्तेमाल करेगी ‘BJP’ के खिलाड़ी! तैयार किया ये बड़ा गेम प्लान

गडकरी को मात देने के लिए कांग्रेस इस्तेमाल करेगी ‘BJP’ के खिलाड़ी! तैयार किया ये बड़ा गेम प्लान



Posted Date: 08 Mar 2019

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नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र सभी पार्टियां इन दिनों सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन करने में जुटी हैं। इस दौरान सभी के लिए सबसे बड़ा तास्त ये हैं कि वे जिताऊ कैंडिडेट पर फोकस करें, ताकि आगामी आम चुनावों में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर सकें। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने अपने छह उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। वहीं सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को शामिल ना किये जाने का खुलासा होने के बाद कांग्रेस ने भी अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी। लेकिन अब कांग्रेस अब इस दिशा में मंथन कर रही है कि चुनावी मैदान में उनकी पार्टी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को कैसे कांटे की टक्कर दे।

हालांकि सोनिया गांधी और उनकी पार्टी नेता नितिन गडकरी द्वारा अपने मंत्रालय में किए गए कार्यों की तारीफ करते रहे हैं। लेकिन ये अब आर-पार की लड़ाई है और भाजपा को उखाड़ फेकने का ख्वाब कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष ने देखा है। इस ख्वाब को तभी पूरा किया जा सकता है, जब वे हर स्टार पर खुद को भाजपा से प्रबल साबित कर सकें।

खबरों के मुताबिक़ चुनावी मैदान में कांग्रेस पार्टी केंद्रीय मंत्री को कड़ा मुकाबला देने की तैयारी में है। कांग्रेस यह तैयारी नागपुर के लिए कर रही है, जहां पार्टी को 2014 में करारी शिकस्त की शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी।

अंदरूनी सूत्रों की मानें तो, कांग्रेस पार्टी आपसी टकराव का सामना कर रहे स्थानीय ईकाई के नेताओं को टिकट के मामले में नजरअंदाज करते हुए किसी बाहरी को मैदान में उतार सकती है।

कांग्रेस के एक शीर्ष नेता ने बताया, ‘पार्टी नागपुर को बेहद गंभीरता से ले रही है, क्योंकि यहां आरएसएस का मुख्यालय भी है। गडकरी को लेकर राहुल गांधी के नरम रवैए की वजह से उठ रही अटकलों की वजह से भले ही गडकरी पीएम पोस्ट के लिए मोदी के सामने एक चुनौती के तौर पर उभरने में कामयाब हुए हों, लेकिन कांग्रेस उनके टक्कर में एक मजबूत बाहरी प्रत्याशी उतारेगी। इससे हमारी पार्टी के अंदर के गतिरोध भी दूर हो जाएंगे।’

बता दें कि 2014 में गडकरी ने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था। जीवन भर आरएसएस के कार्यकर्ता रहे गडकरी ने कांग्रेस के 7 बार के सांसद विलास मुत्तेवर को नागर में 2 लाख 85 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था। गडकरी की जीत को मोदी लहर के परिणाम के तौर पर देखा गया था। हालांकि, इस बार यह 61 वर्षीय नेता बतौर केंद्रीय मंत्री अपने कामकाज के दमखम पर मैदान में उतरेंगे।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस जातिगत समीकरणों के जरिए चुनावी नैया पार लगाने की तैयारी में है। गडकरी के साथ लंबे वक्त तक काम करने वाले पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘दलितों और मुसलमानों को मिलाकर कुल 8 लाख वोट हैं। इसके अलावा, दो लाख हलबा (बुनकरों का एक समुदाय) वोट और 40 हजार ढांगर वोट हैं। पिछली बार हलबा समुदाय ने गडकरी के लिए एक मुश्त वोट डाला था और उन्होंने भी उनकी समस्याएं दूर करने का वादा किया था। लेकिन इस बार इस समुदाय ने बीजेपी को अपने वादे न पूरे करने को लेकर सबक सिखाने का फैसला किया है।

 

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वहीं, ढांगर अनुसूचित जनजाति में न शामिल किए जाने की वजह से बीजेपी से उनका मोहभंग हो गया है। उधर, 4 लाख वोट शक्ति वाले कुनबी (अगड़ी जाति) समुदाय के लोग कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं। इसकी वजह बीजेपी द्वारा क्षेत्र में सारे प्रमुख पदों पर ब्राह्मणों को नियुक्त करना है।’

बता दें नागपुर सीट पर गडकरी के खिलाफ जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमें नाना पटोले और प्रफुल्ल गुडधे का नाम शामिल हैं।

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BY : Ankit Rastogi




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