विशेष - संजीव कुमार: फिल्मजगत की आकाशगंगा में ध्रुव तारा की तरह किए जाते हैं याद

संजीव कुमार: फिल्मजगत की आकाशगंगा में ध्रुव तारा की तरह किए जाते हैं याद



Posted Date: 06 Nov 2018

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संजीव कुमार हिंदी फिल्मों के भारतीय अभिनेता थे। इनका नाम हरिभाई जरीवाल था, लेकिन फिल्मी दुनिया में ये अपने दूसरे नाम ‘संजीव कुमार’ के नाम से मशहूर हैं। इस महान कलाकार का नाम फिल्मजगत की आकाशगंगा में एक ऐसे धु्रवतारे की तरह याद किया जाता है जिनके बेमिसाल अभिनय से बाॅलीवुड हमेशा जगमगाता रहेगा। उन्होंने ‘नया दिन नयी रात’ फिल्म में नौ रोल किए थे। ‘कोशिश’ फिल्म में उन्होंने गूंगे, बहरे व्यक्ति का शानदार अभिनय किया था। ‘शोले’ फिल्म में ठाकुर का चरित्र उनके अभिनय से अमर हो गया।

बता दें इनका जन्म 9 जुलाई 1938 को एक गुजरात के परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन से ही एक्टिंग करने का शौक था और वो चाहते थे कि उन्हें फिल्मों में अभिनेता के तौर पर काम करने का मौका मिले।

अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए वे अपने जीवन के शुरूआती दौर में रंगमंच से जुड़े और बाद में उन्हें फिल्मालय एक्टिंग स्कूल में दाखिला मिला। इसी दौरान वर्ष 1960 में उन्हें फिल्मालय बैनर की फिल्म ‘हम हिंदुस्तानी’ में एक छोटी सी भूमिका निभाने का मौका मिला। इसके बाद इन्हें एक के बाद एक फिल्में मिली जिसमें अभिनय करके वे एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता बने।

फिल्मों में काम करने का सपना देखने के बाद ये हरीभाई से भारतीय फिल्म उद्योग में आकर संजीव कुमार बन गए।

वर्ष 1970 में ही प्रदर्शित फ़िल्म 'दस्तक' में उनके लाजवाब अभिनय के लिए वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के 'राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। वर्ष 1972में प्रदर्शित फ़िल्म 'कोशिश' में उनके अभिनय का नया आयाम दर्शकों को देखने को मिला। फ़िल्म 'कोशिश' में संजीव कुमार ने गूंगे की भूमिका निभायी। बगैर संवाद बोले सिर्फ आंखों और चेहरे के भाव से दर्शकों को सब कुछ बता देना संजीव कुमार की अभिनय प्रतिभा का ऐसा उदाहरण था, जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाए।

फ़िल्म श्कोशिशश् में संजीव कुमार अपने लड़के की शादी एक गूंगी लड़की से करना चाहते है और उनका लड़का इस शादी के लिए राजी नहीं होता है। तब वह अपनी मृत पत्नी की दीवार पर लटकी फ़ोटो को उतार लेते हैं। उनकी आंखों में विषाद की गहरी छाया और चेहरे पर क्रोध होता है।

इस दृश्य के जरिए उन्होंने बिना बोले ही अपने मन की सारी बात दर्शकों तक बडे़ ही सरल अंदाज में पहुंचा दी थी। इस फ़िल्म में उनके लाजवाब अभिनय के लिए उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया।

'खिलौना', 'दस्तक' और 'कोशिश' जैसी फ़िल्मों की कामयाबी से संजीव कुमार शोहरत की बुंलदियों पर जा बैठे। अपनी फ़िल्मों की कामयाबी के बाद भी उन्होंने फ़िल्म 'परिचय' में एक छोटी सी भूमिका स्वीकार की और उससे भी वह दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे। इस बीच 'सीता और गीता', 'अनामिका' और 'मनचली' जैसी फ़िल्मों में अपने रूमानी अंदाज के जरिए दर्शकों के बीच प्रसिद्ध रहे।

भारतीय सिनेमा जगत में संजीव कुमार को एक ऐसे बहुआयामी कलाकार के तौर पर जाना जाता है जिन्होंने नायक, सहनायक, खलनायक और चरित्र कलाकार भूमिकाओं से दर्शकों को अपना दीवाना बनाया। संजीव कुमार के अभिनय में एक विशेषता रही कि वह किसी भी तरह की भूमिका के लिए सदा उपयुक्त रहते थे।

बाद में संजीव कुमार ने गुलज़ार के निर्देशन में 'आंधी', 'मौसम', 'नमकीन' और 'अंगूर' जैसी कई फ़िल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखाया। वर्ष 1942 में प्रदर्शित फ़िल्म अंगूर में संजीव कुमार ने दोहरी भूमिका निभाई

संजीव कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए हैं। वर्ष 1975 में प्रदर्शित फ़िल्म 'आंधी' के लिए सबसे पहले उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार दिया गया।

इसके बाद वर्ष 1976 में भी फ़िल्म 'अर्जुन पंडित' में बेमिसाल अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार से नवाजे गए।


BY : Abdul Mannan


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