आजमगढ़ - जैसे ही अपनों को देखा छलक पड़े आंखो से आंसू, पैरोल पर घर पहुंचा था आंतकवाद का आरोपी शहज़ाद

जैसे ही अपनों को देखा छलक पड़े आंखो से आंसू, पैरोल पर घर पहुंचा था आंतकवाद का आरोपी शहज़ाद



Posted Date: 10 Feb 2019

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आज़मगढ़। आंतकवाद के आरोप में बंद आज़मगढ़ के बिलरियागंज निवासी शहज़ाद अहमद बहन की शादी में शामिल होने पैरोल पर घर पहुंचा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को बीच उसे तिहाड़ जेल से बिलरियागंज लाया गया। बहन की शादी में शामिल होने के लिए उसे दिल्ली हाईकोर्ट से चार घंटे का पैरोल मिला था। शनिवार की सुबह से ही उसे लाने और ले जाने के लिए सिधारी, शहर कोतवाली और बिलरियागंज थाने की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया था।

शहजाद तिहाड़ जेल से जब पुलिस कस्टडी में अपने घर पहुंचा तो घर पर परिजन के साथ नाते रिश्तेदार उसके आने की बाट जोह रहे थे। मां परवीन बानों बेटा की बेसब्री से इंतजार कर रही थी। मां, पिता, चाचा, भाई व बहनों को देखते ही शहजाद उनके गले लगते ही फफक कर रो पड़ा। छोटी बहन सुंबुल की शादी गांव के ही एक युवक से हुई है जिसमें शिरकत करने के लिए वह सालों बाद घर पहुंचा।

बता दें कि 19 सिंतबर 2008 को दिल्ली में हुए चर्चित बटला हाउस एनकांउटर में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे और वहीं जनपद के ही दो युवक आतिफ और साजिद मारे गए थे। मुठभेड़ के बाद से ही दिल्ली पुलिस व अन्य एजेंसियां ने यहां के कई युवकों को इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके अलावा जिले के फरार दर्जन भर संदिग्धों पर पुरस्कार रखा गया था जिसमें शहज़ाद का भी नाम था।

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नाटकीय घटनाक्रम में 01 फरवरी 2010 को सुरक्षा एजेंसियों ने शहज़ाद को आज़मगढ़ के खालिसपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया था। जुलाई 2013 में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने शहज़ाद अहमद को इंस्पेक्टर की हत्या में उम्रकैद की सज़ा सुनाई और 95000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जिसमें 50000 रुपये इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के परिवार को दिए जाने के निर्देश थे।

हालांकि शहज़ाद के वकील और उसके घरवालों ने इस फैसले पर असहमति प्रकट करते हुए इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। बचाव पक्ष ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए कहा था कि उनकी न्यायिक जांच की मांग सरकार ने पूरी नहीं की तथा शहज़ाद पर लगाये गये सभी आरोप झूठे हैं।

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BY : Saheefah Khan




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