अंतरराष्ट्रीय - वेनेजुएला: आर्थिक संकट ने छीना लोगों के मुंह से निवाला, दो जून की रोटी के लिए भी तरस रहें लोग

वेनेजुएला: आर्थिक संकट ने छीना लोगों के मुंह से निवाला, दो जून की रोटी के लिए भी तरस रहें लोग



Posted Date: 25 Aug 2018

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कराकस। नोटबंदी के बाद भारत में कईयों की शिकायत है कि एटीएम में पैसा आता नहीं है कि चला जाता है। भारत से करीब 14 हज़ार किलोमीटर दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में भी कुछ ऐसे ही हालात है। यहां भी एटीएम तीन-चार घंटे में ही खाली हो जा रहे हैं। बल्कि इस देश में ऐसा नोटबंदी के चलते नहीं बल्कि किसी दूसरी वजह से हो रहा है।

दुनिया के सबसे बड़े तेल भण्डार वाले देश वेनेजुएला ने इस संकट की जड़े 2014 तक जाती है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दो-तिहाई तक की गिरावट आई थी। इससे वेनेजुएला की आय पर काफी बुरा असर पड़ा है। आलम ये है कि यहां के करोड़पति दो वक्त रोटी का भी इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। एक किलो सब्जी खरीदने के लिए लाखों देने पड़ रहे हैं। आलम यह है कि एक किलो मीट के लिए 3 लाख रुपए और एक लीटर दूध के लिए 80 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। एक ब्रेड की कीमत हजारों रुपए हो गए हैं। वाकई में महंगाई की असली मार क्या होती है वेनेजुएला में ही देखने को मिल रही है।

आलम ये है कि लोग वेनेजुएला को छोड़कर पड़ोसी देश कोलंबिया भाग रहे है। यहीं नहीं इस आर्थिक संकट का असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ रहा है और उन्हें अपने बच्चे को जन्म देने के लिए पड़ोसी देश ब्राजील जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। अपने देश में गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों, दवाइयों और डायपर की कमी के कारण ये महिलाएं ब्राजील जा रही हैं जहां हर दिन वेनेजुएला के तीन बच्चों का जन्म हो रहा है।

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जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आने के चलते वेनेजुएला में आर्थिक संकट आया है। यहां की सरकार ने जरूरत से ज्यादा कैरेंसी छपवा दिए हैं, जिसके चलते इसकी वैल्यू काफी कम हो गए हैं। सरकार की गलत नीतियों के चलते भूखमरी के हालात बने हैं।

वहीं कोलंबिया ने इस संकट से निपटने के लिए दुनिया से मानवीय आधार पर मदद मांगी है।

इस संकट से वेनेजुएला को तभी राहत मिल सकती है जब तेल की कीमतें बढ़ जाएं या फिर कोई दूसरा देश उसकी आर्थिक मदद करे। फिलहाल तो यह होता नहीं दिख रहा।

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BY : ANKIT SINGH


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