राष्ट्रीय - देश में पहली बार बायोफ्यूल से उड़ा विमान, स्पाइसजेट ने किया सफल परीक्षण

देश में पहली बार बायोफ्यूल से उड़ा विमान, स्पाइसजेट ने किया सफल परीक्षण



Posted Date: 27 Aug 2018

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देहरादून। पर्यावरण प्रदूषण कम करने और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए किफायती विमान सेवा प्रदाता स्पाइसजेट ने भारतीय विमानन के इतिहास में एक नई मिसाल पेश की।

सोमवार को स्पाइसजेट ने जैव जेट ईंधन से चलने वाली पहली विमान (बॉम्बार्डियर क्यू400) का सफल परीक्षण उड़ान किया। यह विमान देहरादून से रवाना होकर दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी। इसमें आंशिक रूप से जैव जेट ईंधन का इस्तेमाल किया गया है, जो 75 प्रतिशत एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) और 25 प्रतिशत जैव जेट ईंधन का मिश्रण था।

यह बायोफ्यूल (जैस ईंधन) देहरादून के मोहकमपुर स्थित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) ने तैयार किया है। यह फ्यूल जेट्रोफा नामक पौधे से तैयार किया गया है।

इससे पहले रविवार को इस विमान की टेस्ट फ्लाइट बायोफ्यूल भरकर की गई थी। 25 मिनट की टेस्ट फ्लाइट पूरी तरह से सफल होने के बाद ही सोमवार को इस डेमो फ्लाइट को दिल्ली भेजा गया।

इसके बाद सोमवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आईआईपी के वैज्ञानिकों, इंडियन स्पेस एजेंसी, स्पाइस जेट और एयरपोर्ट के अधिकारियों की मौजूदगी में विमान को रन-वे पर झंडी दिखाकर रवाना किया। विमान के उड़ान भरते ही एयरपोर्ट का वह इलाका मौजूद लोगों की तालियों से गूंज उठा। विमान में बैठे वैज्ञानिकों का दल भी नीचे मौजूद लोगों को हाथ हिलाकर अभिवादन करता नजर आया।

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एयरलाइन में बयान में कहा कि एटीएफ की तुलना में जैवजेट ईंधन इस्तेमाल का फायदा यह है कि इससे कॉर्बन उत्सर्जन घटता है और साथ ही ईंधन दक्षता भी बढ़ती है।

बता दे कि इस नई तकनीकी के जरिए प्रत्येक उड़ान के निर्भरता में करीब 50 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। इससे किराये में भी कमी आएगी। जैव जेट ईंधन को अमेरिकी मानक परीक्षण प्रणाली (एएसटीएम) से मान्यता है और यह विमान में प्रैट एंड व्हिटनी तथा बॉम्बार्डियर के वाणिज्यिक एप्लिकेशन के मानदंडों को पूरा करता है।


BY : ANKIT SINGH


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