अंतरराष्ट्रीय - विदेशी महिला की अच्छी पहल, लावारिस जानवरों को दफनानें के लिए खरीदी ज़मीन

विदेशी महिला की अच्छी पहल, लावारिस जानवरों को दफनानें के लिए खरीदी ज़मीन



Posted Date: 11 Mar 2019

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नई दिल्ली। आए दिन हम सभी अनेक भारतीय परोपकारी लोगों के बारे में सुनते आए हैं, जो जानवरों के हित के लिए अनेक तरह से कार्य करते हंै। लेकिन अगर कोई विदेशी महिला हिंदुस्तान के जानवरों के लिए कुछ परोपकार करे, तो ये चैकाने वाला मामला है।

दिलचस्प वाक्या सामने आया है, बिहार के बोधगया जिले से। जहां एक विदेशी महिला ने लावारिश मरे हुए जानवर के लिए कब्रिस्तान का निर्माण करवाया।

बता दें बोधगया में एक ऐसा कब्रिस्तान बना हुआ है, जहां जानवर दफनाए जाते हैं। इसका निर्माण इटली की रहनें वाली एड्रियाना फ्रेंटी ने करवाया। इसके लिए उन्होंने करीब 7200 वर्ग फीट जमीन ख़रीदी। जिसको उन्होंने लावारिश मरे हुए पशु को दफनाने के लिए दे दिया। साथ ही उन्होंने अपने घर में एक अस्पताल बनवाया है, जहां लावारिश पशुओं की स्ट्रीट डॉग्स का इलाज किया जाता है।

उन्होंने एक निजी अख़बार के पत्रकार से बातचीत में बताया कि वो 1982 में इटली से हिंदुस्तान घूमने आई थीं। यहां उन्होंने हिंदुस्तान के तमाम शहर का भ्रमण किया। उनमें से एक बोधगया भी शामिल है। बोधगया में घूमने के दौरान यहां की संस्कृति से प्रभावित होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया।

पत्रकार ने जब एड्रियाना से पशुओं से जुड़ इस समाज सेवा के बारें में बात कि तो उन्होंने बताया 1991 में एक सफर के दौरान देखा की एक लावारिस कुत्ते के शव को नदी में फेका जा रहा है, जिसको देखकर उनका मन विचलित हो उठा और उन्होंने उस दिन से जानवरों के इलाज और उन्हें जानवरों के मृत शरीर को दफनाए जाने का इंतजाम करने की ठान ली।

जिसके कुछ दिन बाद उन्होंने बिहार के बोधगया में धंधवा गांव के पास जमीन खरीदकर जानवर के अस्पताल का निर्माण करवाया।

दिलचस्प बात यह है कि 1992 से लगातार जानवरों को यहां दफनाया जा रहा हैं। कब्रिस्तान में जितने भी जानवर दफनाए जाते हैं उनकी पहचान के लिए उनके नाम और उनकी दफनाने की तारीख लिख कर एक तख्ती लगाई जाती है। मरे हुए जानवरों का पहले बौद्ध रीति रिवाज के तहत धार्मिक कर्मकांड किया जाता है। उसके बाद दफनाया जाता है।

लगभग 27 साल से यहां गाय, कुत्ता, बकरी, खरगोश, आदि समेत करीब तीन हजार से भी अधिक जानवरों को इस कब्रिस्तान में दफनाया जा चुका है।

एड्रियाना फ्रेंटी अपनी संस्था के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताती हैं कि जानवरों के संरक्षण में लगी हमारी संस्था की टीम ग्रामीण और शहर से लावारिस बीमार जानवरों को लाती हैं। उनका इलाज करती हैं और ठीक हो जाने पर उनको वापस उनके इलाके में छोड़ दिया जाता है. जो जानवर अत्यधिक बीमार होने के कारण मर जाते हैं उनको दफना दिया जाता है।

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BY : Abdul Mannan




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