राष्ट्रीय - ISRO अगले साल जनवरी में लांच करेगा चंद्रयान-2, चांद के इस हिस्से पर पहुंचने वाला पहला देश बनेगा भारत

ISRO अगले साल जनवरी में लांच करेगा चंद्रयान-2, चांद के इस हिस्से पर पहुंचने वाला पहला देश बनेगा भारत



Posted Date: 28 Jul 2018

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चेन्नई। आखिरकार भारत के सबसे महात्वाकांक्षी चंद्रयान-2 मिशन की तारीख तय हो गई है। इसरो ने ऐलान किया है कि चंद्रयान-2 मिशन को अगले साल जनवरी में लॉन्च किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले मिशन लॉन्च की तारीख कई बार टल चुकी है। इस मिशन को पिछले साल 23 अप्रैल को अंजाम देना निर्धारित किया गया था। उसके बाद चंद्रयान-2 को अक्टूबर के पहले सप्ताह में भेजा जाना था, लेकिन फिर उसे दिसंबर, 2018 तक टाल दिया गया। इसरो ने बताया कि मार्च 2019 से पहले 19 स्पेस मिशन लॉन्च किए जाएंगे।

इस मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो पहली बार अपने यान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की कोशिश करेगा। भारत के चंद्रयान-1 अभियान ने ही पहली बार चांद पर पानी की खोज की थी। चंद्रयान-2 इसी अभियान का विस्तार है।

बता दें कि अब तक अमेरिका, रूस और चीन पहले ही चांद पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। अब चांद तक पहुंचने की रेस में दो एशियाई देश भारत और इजरायल हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि भारत और इजरायल में से कौन सा देश चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बनेगा।

कहा जा रहा है कि चंद्रयान-2 मिशन के जरिए भारत दक्षिण ध्रुव के करीब सॉफ्ट लैंडिंग कर, छह पहियों वाले रोवर को स्थापित करने की तैयारी में है, ताकि चांद की सतह से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की जा सकें। अपने इस मून मिशन के लिए भारत अपने सबसे भारी रॉकेट बाहुबली का इस्तेमाल कर रहा है।

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चंद्रयान-2 यान का वजन 3,290 किलो है और यह चंद्रमा के चारों ओर चक्कर काटेगा और उसका अध्ययन करेगा। यान के पेलोड चांद की सतह से वैज्ञानिक सूचनाएं और नमूने एकत्र करेंगे। यह पेलोड चांद के खनिज, तत्वों की संरचना, चांद के वातावरण और वाटर आइस का भी अध्ययन करेगा। इसरो ने अपना पहला चंद्र अभियान चंद्रयान-1 वर्ष 2008 में लांच किया था।

बता दे इसरो ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान का खाका भी तैयार कर लिया है। इसके जरिए तीन अंतरिक्ष यात्री 350 से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतरिक्ष यान में बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाएंगे। वे बेहद कम गुरुत्वाकर्षण से जुड़े प्रयोग करेंगे। यह मिशन दिसंबर 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे पहले यह प्रयोग दो बार मानवरहित किया जाएगा।

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BY : ANKIT SINGH


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