राष्ट्रीय - झुंझनू मामले में वहशियत की सारी हदें पार, छलका जज का दर्द, कहा- 3 साल की मासूम को साड़ी कैसे पहनाऊ

झुंझनू मामले में वहशियत की सारी हदें पार, छलका जज का दर्द, कहा- 3 साल की मासूम को साड़ी कैसे पहनाऊ



Posted Date: 01 Sep 2018

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झुंझुनूं/चंड़ीगढ। कपड़ों के कारण होते रेप जो कहें, उन्हें बतलाऊं मैं, आखिर तीन साल की बच्ची को साड़ी कैसे पहनाऊं। ये उस कविता की पंक्ति है जिसे निचली अदालत ने झुंझनूं में हुए तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले पर सुनवाई के दौरान सुनाई।

यह मामला राजस्थान के झुंझनू इलाके का है। यहां एक 3 साल की बच्ची अपने ननिहाल आई हुई थी। घर के बाहर खेल रही थी। इसी बीच दौसा जिले के मंडावरी का रहने वाला विनोद कुमार वहां पर बर्तन बेंचने के लिए गुजर रहा था। तारीख थी 2 अगस्त। बच्ची को अकेला देख उसने घर में ही उसके साथ ज्यादती की और उसे लहुलुहान कर दिया। इसी बीच उसकी नानी वहां आ गईं तो विनोद वहां से तो भाग निकला। परिवार ने फौरन ही थाणे जाकर मामला दर्ज करवाया।

पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए अगले दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मात्र तीन दिन के अंदर आरोपी के खिलाफ चालान पेश कर दिया। कोर्ट ने भी बिना देरी करते हुए आरोपी के खिलाफ अपना सुनाया।

न्यायाधीश नीरजा दाधीच ने आरोपी को धरा 450 के तहत दस वर्ष के कठोर कारावास, लैंगिंग अपराधों से बालकों संरक्षण अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आजीवन कारावास और धारा 376 ए, बी के तहत मृत्युदंड से दंडित किया।

आरोपी को मौत की सजा सुनाते वक्त जज निरजा दधीच भावुक भी हो गईं। जजमेंट में एक मार्मिक कविता भी लिख दी। उसे सबको सुनना चाहिए। पढ़िए क्या लिखा उन्होंने –

वो मासूम नाजुक बच्ची एक आंगन की कली थी, वह मां-बाप की आंख का तारा थी, अरमानों से पली थी। जिसकी मासूम अदाओं से मां-बाप का दिन बन जाता था, जिसकी एक मुस्कान के आगे पत्थर भी मोम बन जाता था। वह छोटी-सी बच्ची, ढंग से बोल नहीं पाती थी, दिखा के जिसकी मासूमियत, उदासी मुस्कान बन जाती थी। जिसने जीवन के केवल तीन बसंत ही देखे थे, उस पर यह अन्याय हुआ, यह कैसे विधि के लेखे थे। एक तीन साल की बेटी पर यह कैसा अत्याचार हुआ, एक बच्ची को दरिंदों से बचा नहीं सके, यह कैसा मुल्क लाचार हुआ। उस बच्ची पर जुल्म हुआ, वह कितनी रोई होगी, मेरा कलेजा फट जाता है तो मां कैसे सोई होगी। जिस मासूम को देखकर मन में प्यार उमड़ के आता है, देख उसी को मन में कुछ के हैवान उतर आता है। कपड़ों के कारण होते रेप जो कहें, उन्हें बतलाऊं मैं, आखिर तीन साल की बच्ची को साड़ी कैसे पहनाऊं। गर अब भी ना सुधरे तो एक दिन ऐसा आएगा, इस देश को बेटी देने से भगवान भी घबराएगा।

चंडीगढ़ में 21 साल की युवती से सामूहिक दुष्कर्म मामले में आरोपियों को ताउम्र जेल की सजा

अदालत में झुंझुनूं केस के अतिरिक्त दुष्कर्म के दूसरे मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय की जज पूनम आर जोशी ने तीन आरोपियों को ताउम्र जेल में रखने की सजा सुनाई साथ ही 2 लाख 5 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया।

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यह मामला चंडीगढ़ का है जहां 21 साल की युवती के साथ 3 युवकों से सामूहिक दुष्कर्म किया था।

17 नवंबर 2017 को चंडीगढ़ के सेक्टर सेक्टर-53 में 21 साल की युवती हॉस्टल से घर जा रही थी। ऑटोवाले ने उसे बेटी कहकर बैठाया। इसमें दो लड़के पहले से थे। ये लोग सेक्टर-42 के पास स्थित जंगल में ऑटो ले गए और युवती से दुष्कर्म किया। कोर्ट ने दोषी ऑटो चालक मोहम्मद इरफान और उसके दो साथियों मोहम्मद गरीब और किस्मत अली को ताउम्र जेल में रखने की सजा सुनाई।

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BY : ANKIT SINGH


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