राष्ट्रीय - कश्मीर से भी अहम पाकिस्तान के लिए ये समझौता, नहीं बनी बात तो बूंद-बूंद के लिए मचेगी चीख-पुकार

कश्मीर से भी अहम पाकिस्तान के लिए ये समझौता, नहीं बनी बात तो बूंद-बूंद के लिए मचेगी चीख-पुकार



Posted Date: 30 Aug 2018

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नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान के बीच आमतौर पर कश्मीर मुद्दे को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच एक ऐसा भी समझौता जोकि पाकिस्तान के लिए कश्मीर से भी अहम है। अगर भारत यह समझौता तोड़ देता है तो, पाकिस्तान का हलक तक सूख जाएगा। हाल ही में पाकिस्तान में इमरान खान ने प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला है। पीएम बनते ही इमरान ने भारत के साथ पहली वार्ता कश्मीर समझौते के लिए नहीं बल्कि सिंधु जल समझौते या सिंधु जल संधि को लेकर रखी है। इस मुद्दे पर बातचीत के लिए भारत की तरफ से भारतीय जल आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंच चुका है।

जानिए भारत द्वारा सिंधु समझौता तोड़ देना पर आखिर कैसे सूख जाएगी पाकिस्तान की हलक

दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में से एक मानी जाने वाली सिंधु की लंबाई 3000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। यह गंगा से भी बड़ी नदी है। अगर बात करें इसकी सहायक नदियों की तो इनमें मुख्य रुप से चिनाब, झेलम, सतलज, राबी व ब्यास शामिल हैं। इनका संगम तो पाकिस्तान में होता है लेकिन इन नदियों के उद्गम के पास वाले इलाके भारत में पड़ते हैं। जिसका मतलब यह है कि ये नदियां भारत से पाकिस्तान में जाती हैं। इस वजह से भारत चाहे तो पाकिस्तान के लिए यह पानी रोक सकता है।

दरअसल पाकिस्तान के दो-तिहाई हिस्से में सिंधु और उसकी सहायक नदियां आती हैं। पाकिस्तान की 2.6 करोड़ एकड़ ज़मीन की सिंचाई इन नदियों पर निर्भर है। इसके अलावा पाकिस्तान ने इस पर कई बांध भी बनाए हुए हैं, जिससे वह बिजली बनाता है और खेती के लिए भी पाकिस्तान में इस नदी के पानी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में अगर भारत पानी रोक दे तो पाक में पानी संकट पैदा हो जाएगा, खेती और जल विद्युत बुरी तरह प्रभावित होंगे।

जानिए क्या है सिंधु समझौता

1960 में भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान के बीच ये संधि हुई थी। इसमें सिंधु नदी बेसिन में बहने वाली 6 नदियों को पूर्वी और पश्चिमी दो हिस्सों में बांटा गया। पूर्वी हिस्से में बहने वाली नदियों सतलज, रावी और ब्यास के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है, लेकिन पश्चिमी हिस्से में बह रही सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी का भारत सीमित इस्तेमाल कर सकता है। संधि के मुताबिक भारत इन नदियों के पानी का कुल 20 प्रतिशत पानी ही रोक सकता है। भारत अपनी 6 नदियों का 80% पानी पाकिस्तान को देता है। वह चाहे तो इन नदियों पर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना सकता है, लेकिन उसे रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट ही बनाने होंगे, जिनके तहत पानी को रोका नहीं जाता। हालांकि भारत कृषि के लिए इन नदियों का इस्तेमाल कर सकता है।

सिंधु समझौते को लेकर पीएम मोदी दे चुके हैं पाकिस्तान को कड़ा संदेश

सिंधु समझौते को लेकर पीएम मोदी पाकिस्तान को पहले ही कड़ा संदेश दे चुके हैं। 25 नवंबर 2016 को बठिंडा में बोलते हुए मोदी ने कहा था कि सिंधु नदी का पानी भारतीय किसानों का है। हमारे किसानों को पर्याप्त पानी मुहैया कराने के लिए हम कुछ भी करेंगे। हालांकि 2016 में ही पीएम नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि पर हुई बैठक के दौरान कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं।

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हालांकि वर्तमान हालातों को देखते हुए भारत द्वारा सिंधु समझौते को तोड़ने की संभावना कम ही है। वहीं विशेषज्ञों की भी इस मामले में कोई एकमत राय नहीं बन पा रही है। इसके अलावा यह समझौता तोड़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि खराब होने की संभावना है। क्योंकि इसके बाद पाकिस्तान को दुनिया भर में भारत के खिलाफ बोलने का एक मुद्दा मिल जाएगा। इसके बावजूद अगर भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय दबावों को दरकिनार कर सख्त रुख अपनाते हुए इस समझौते को तोड़ देता है तो, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर टूटने की नौबत उत्पन्न हो जाएगी। पाकिस्तान के नए पीएम इमरान खान भी इस बात को बाखूबी समझते हैं इसलिए उन्होंने कश्मीर मुद्दे से पहले सिंधु समझौते को महत्व दिया है।

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BY : INDRESH YADAV


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