विशेष - जयनारायण व्यास : देश की सियासत में अपना सिक्का जमाने वाले प्रसिद्ध राजनेता एवं पत्रकार

जयनारायण व्यास : देश की सियासत में अपना सिक्का जमाने वाले प्रसिद्ध राजनेता एवं पत्रकार



Posted Date: 14 Mar 2019

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देश के स्वंतत्रता संग्राम की लड़ाई में भागीदार बनने वाले और उसके लिए कई बार जेल की सज़ा भुगतने वाले क्रांतिकारी जयनारायण व्यास का जन्म 18 फरवरी, 1899 में जोधपुर राजस्थान में हुआ था तथा उनकी मृत्यु 14 मार्च, 1963 को हुई थी। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध राजनेता भी थे और राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे।

राजस्थान के जोधपुर में जब जयनारायण व्यास ने जन्म लिया उस समय देश दासता की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। ऐसे माहौल में वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सबसे पहले सामंतशाही के खिलाफ आवाज़ उठाई और जागीरदारी प्रथा की समाप्ति के साथ रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना पर बल दिया। सन् 1927 में उन्होंने तरुण राजस्थान पत्र में बतौर संपादक कार्यभार संभाला और 1936 में अखण्ड भारत नामक दैनिक समाचार पत्र निकालना प्रारंभ किया।

देश को आज़ादी दिलाने के लिए उन्होंने जयनारायण व्यास ने क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया और कई बार जेल की यात्राएं कीं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 1933 में जेल से रिहा होने के बाद व्यास जी ने अखिल भारतीय देशी राज्य प्रजा परिषद का गठन किया। पंडित जवाहर लाल नेहरु को इसका अध्यक्ष बनाया गया और जयनारायण ने सचिव का काम संभाला।

उसी समय उन्होंने अखंड भारत नाम का अखबार निकालना शुरु किया। उनकी आर्थिक स्थिति का हाल यह था कि वह दिन में जो अखबार बेचत रात में उसी के बचे हुए अंक समंदर किनारे बिछा कर सो जाते थे। दो साल बाद अखबार बंद हो गया तो वह बोरिया बिस्तर समेट वापिस जोधपुर चले गए। वहां मारवाड़ लोकपरिषद के काम में लग गए। अंग्रेज़ सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव कराया तो वह नगरपालिका अध्यक्ष बन गए।

उसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई और व्यास जी अपने सारे पद त्याग कर स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में कूद पड़े। फिर गिरफ्तार कर लिए गए और 1945 में जेल से रिहा हुए। आखिर देश के बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों के साहस से 1947 में देश आज़ाद हो गया। 1948 में उन्हें जोधपुर राज्य की लोकप्रिय सरकार का मुख्यमंत्री बना दिया गया। मगर यह राज्य ज़्यादा दिनों तक नहीं चल सका क्योंकि 30 मार्च 1949 को सब रियासतों को मिलाकर राजस्थान बना दिया गया।

 26 अप्रैल 1951 को वह फिर से सीएम बने मगर कुछ ही महींनो के लिए क्योंकि 1951 के आखिर से देश के पहले चुनाव की प्रक्रिया शुरु हो गई। चुनाव हुए तो दो सीटों से लड़ने वाले सीएम व्यास चुनाव हार गए और सीएम की कुर्सी उनसे छिन गई। कांग्रेस पार्टी में ऊंची पहुंच रखने वाले तथा नेहरु के करीबी माने जाने वाले जयनारायण व्यास एक बार राज्यसभा सांसद बने और दो साल प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।


BY : Saheefah Khan




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