विशेष - मन्मथनाथ गुप्ता : जिन्होंने बचपन से स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी निभाई और अपनी कलम से भी देश सेवा की

मन्मथनाथ गुप्ता : जिन्होंने बचपन से स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी निभाई और अपनी कलम से भी देश सेवा की



Posted Date: 07 Feb 2019

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7 फरवरी 1908 को भारत की ऐतिहासिक धरती पर एक ऐसे महान क्रान्तिकारी का जन्म हुआ था जिससे बहुत कम ही भारतीय परिचित हैं लेकिन उसने बचपन में ही स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने कलम के द्वारा भी लोगों को जाग्रत करने का काम किया। बाद में अपने साहित्य द्वारा अपनी कला से दुनिया को रुबरु कराया। वह महान शख्स थे मन्मथनाथ गुप्ता।

उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। उनके पिता नेपाल के एक स्कूल में हेडमास्टर थे। इसलिए उनकी प्रांरभिक शिक्षा नेपाल में ही हुई। बाद में वह वाराणसी आ गए और उस समय के राजनीतिक वातावरण का उन पर गहरा असर पड़ा। 1921 में ब्रिटने के युवराज के बहिष्कार का नोटिस बांटते हुए गिरफ्तार हो गए और तीन महीने तक जेल में रहे। जेल से छूटने पर उन्होंने काशी विद्यापीठ में प्रवेश लिया और वहां से विशारद की परीक्षा पास की।

1925 के प्रसिद्ध काकोरी कांड में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। ट्रेन रोककर ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटने वाले 10 व्यक्तियों में वे भी सम्मिलित थे। इसके बाद गिरफ्तार हुए, मुकदमा चला और 14 वर्ष के कारावास की सजा हो गई। लेखन के प्रति उनकी प्रवृत्ति पहले से ही थी। जेल जीवन के अध्ययन और मनन ने उसे पुष्ट किया। छूटने पर उन्होंने विविध विधाओं में विपुल साहित्य की रचना की। उनके प्रकाशित ग्रंथों की संख्या 80 से अधिक है।

‘भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का इतिहास’, ‘क्रान्ति युग के अनुभव’, ‘चंद्रशेखर आज़ाद’, ‘विजय यात्रा’, ‘यतींद्रनाथ दास’, ‘कांग्रेस के सौ वर्ष’, ‘कथाकार प्रेमचंद’, ‘प्रगतिवाद की रुपरेखा’, ‘साहित्यकला समीक्षा’ आदि उनकी प्रमुख साहित्य रचना है। 26 अक्टूबर, 2000 को उनका निधन हो गया।


BY : Saheefah Khan




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