राजनीति - पीएम मोदी के गले की फांस बनी राफेल डील, इस नए दावे ने खड़े किये भ्रष्टाचार के बड़े सवाल

पीएम मोदी के गले की फांस बनी राफेल डील, इस नए दावे ने खड़े किये भ्रष्टाचार के बड़े सवाल



Posted Date: 11 Feb 2019

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नई दिल्ली। विपक्ष लगातार राफेल विमान सौदे को हथियार बनाकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर है। वहीं भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोपों के बीच एक और कड़ी भाजपा की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रही है। बता दें हाल ही में एक जाने माने अंग्रेजी समाचार पत्र ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि डील साइन होने से पहले भ्रष्टाचार विरोधी जुर्माने के प्रमुख प्रावधान और एक एस्क्रो अकाउंट हटा दिया गया था। वहीं रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार खत्म करने पर जोर देने का दावा करने वाली सरकार की ओर से राफेल डील में बड़ी रियायत बरती गई थी। यह दावा विपक्ष के उन आरोपों को बल देता है, जिसमें राफेल के एवज में अदा की गई ज्यादा कीमत को लेकर सवाल खड़े किये गए थे।

खबरों के मुताबिक़ रक्षा मंत्रालय के अलावा सौदे में पीएमओ के ‘समानांतर बातचीत’ की भूमिका पर मचा हंगामा होने के बाद सामने आई रिपोर्ट ने मोदी सरकार पर विमान सौदे से ‘भ्रष्टाचार विरोधी क्लॉज’ हटाने का दावा किया है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फिर सीधा हमला बोला है। उन्होंने राफेल डील में पीएम की भूमिका को संदिग्ध बताया है और कहा कि चौकीदार चोर है। 

दिल्ली स्थित आंध्र भवन में टीडीपी अध्यक्ष एन। चंद्रबाबू नायडू के प्रदर्शन में पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “प्रत्येक रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान होते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘द हिंदू’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री ने (सौदे से) भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान को हटवा दिया। इससे जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री ने लूट की छूट मुहैया कराई।”

बता दें रिपोर्ट में कहा गया कि भारत सरकार ने डील पर हस्ताक्षर होने के कुछ दिन पहले ही भ्रष्टाचार विरोधी दंड और एस्क्रो एकाउंट (तीसरे पक्ष को दिए गए पैसे का लिखित ब्योरा) के तहत पेमेंट के प्रावधान को हटा दिया।

बताया जा रहा है कि भारत और फ्रांस के बीच हो रहे 7.87 बिलियन यूरो के राफेल डील में मोदी सरकार ने यह अप्रत्याशित छूट दी।

ऐसे में यह मोदी सरकार के उस दावे पर सवाल उठाता है, जिसमें अक्सर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही जाती रही है। यह कदम उस दावे का भी खंडन है, जिसमें यूपीए सरकार के दौरान हुए रक्षा सौदों में घोटालों पर कार्रवाई की बात कही गई थी।

इससे पहले भी ‘द हिंदू’ ने राफेल रक्षा सौदे में पीएमओ की दखल की बात उजागर की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में आपत्ति भी जाहिर की थी और डील को प्रभावित करने वाला कदम बताया था। अब डील से महज कुछ ही दिन पहले भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान हटाने वाली बात को पीएमओ की दखल से जोड़कर देखा जा रहा है।

बता दें 23 सितंबर, 2016 को IGA (Inter-governmental agreement) के तहत भारत और फ्रांस के बीच हस्ताक्षर के मुताबिक दसॉ कंपनी राफेल एयरक्राफ्ट की सप्लायर होगी, जबकि MBDA फ्रांस भारतीय एयरफोर्स के लिए हथियारों की सप्लायर करेगी।

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रिपोर्ट में दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ‘रक्षा खरीद परिषद’ (DAC) के प्रमुख तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने सितंबर 2016 में दोनों देशों के सौदे में 8 नए सुधार और तब्दिलियां कीं। सौदे में बदलाव उन्होंने तब किए जब IGA (Inter-governmental agreement) और इससे संबंधित दस्तावेजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा सलाहकार समिति ने 24 अगस्त, 2016 को पारित किया।

ध्यान रहे कि इस दौरान सौदे में हुए 8 बदलावों में ही सप्लाई प्रोटोकॉल के तहत भ्रष्टाचार के खिलाफ दंड से संबंधित प्रावधान शामिल थे। लेकिन, बाद में भारत सरकार ने इस प्रावधान को हटा लिया।

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BY : Ankit Rastogi




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