राजनीति - चुनाव तारीखों पर सवाल उठा रहे नेताओं को ओवैसी का जवाब, कहा- रमाजान से वोटिंग पर कोई प्रभाव नहीं

चुनाव तारीखों पर सवाल उठा रहे नेताओं को ओवैसी का जवाब, कहा- रमाजान से वोटिंग पर कोई प्रभाव नहीं



Posted Date: 11 Mar 2019

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, निर्वाचन आयोग द्वारा अप्रैल से मई के दौरान करीब 40 दिनों तक होने वाली मतदान प्रक्रिया के कुछ दिन रमजान महीने में पड़े रहे हैं। इसको लेकर कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने नाराज़गी जाहिर की है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ऐसे नेताओं को जवाब दिया है।

ओवैसी ने सोमवार को कहा कि मुस्लिमों के पाक महीने रमजान में चुनाव होने का मतदाताओं की उपस्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा इस तरह का विवाद उठाने को लेकर निंदा की। हैदराबाद से सांसद ने उम्मीद जताई कि रमजान के दौरान मतदान का प्रतिशत ज्यादा होगा, क्योंकि उपवास के महीने के दौरान महसूस होने वाली आध्यात्मिकता की वजह से अधिक संख्या में मुस्लिम बाहर आएंगे व वोट डालेंगे।

रमजान के दौरान वोट डालने पर कोई दिक्कत नहीं

एआईएमआईएम ने कहा, ‘मुस्लिम उपवास के दौरान कार्यालय जाते हैं और अपना व्यवसाय करते हैं। इसमें मजदूर, रिक्शा चालक भी शामिल हैं जो उपवास रखते हैं। उनकी सामान्य गतिविधि प्रभावित नहीं होती।’ उन्होंने कहा, ‘रमजान के दौरान चुनाव वाले राज्यों में मतदान के दिन छुट्टी होगी, ऐसे में मुस्लिमों को वोट डालने में कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘सच तो यह है कि रमजान के दौरान वे रोजमर्रा के खाना बनाने व खाने के कामों से मुक्त होंगे।’

ओवैसी ने कहा, ‘चुनाव प्रक्रिया को 3 जून को पूरा होना है और अगर रमजान 5 मई से शुरू होकर 4 जून को समाप्त हो रहा है तो चुनाव आयोग के पास इस अवधि के दौरान चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में यह कहना गलत है कि रमजान की वजह से मतदान प्रतिशत में गिरावट आएगी।

एआईएमआईएम चीफ ने , ‘मैं आपको एक मुस्लिम के तौर पर बता रहा हूं कि रजमान के दौरान मेरी आध्यात्मिकता व अल्लाह से नजदीकी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक हितों के लिए मुस्लिमों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’

टीएमसी नेता ने उठाए थे सवाल

बता दें कि कोलकाता के मेयर और टीएमसी नेता फिरहाद हाक़िम ने चुनाव आयोग की तारीखों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक बॉडी है मैं उसका आदर करता हूं, मैं उसके खिलाफ कुछ भी नहीं कहना चाहता हूं। लेकिन सात चरणों में चुनाव होने की वजह से बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान जो लोग रमजान का व्रत करते होंगे उनके लिए यह समय काफी तकलीफ देय साबित होगा।

फिरहाद हाक़िम ने कहा कि इन तीन राज्यों में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या अधिक है और मतदान की तारीखें उन दिनों में हैं जब वह रोजा रखे हुए होंगे। चुनाव आयोग को अल्पसंख्यक मतदाताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। हाक़िम भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा नहीं चाहती की मुस्लिम मतदान करें। लेकिन हम इस बात को चिंतित बिल्कुल नहीं है क्योंकि हमलोगों ने ठान लिया है ‘बीजेपी हटाओ देश बचाओ।’


BY : shashank pandey




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