विशेष - परिमार्जन नेगी : देश को मिला शतरंज के सुनहरे भविष्य को आगे बढ़ाने वाला खिलाड़ी

परिमार्जन नेगी : देश को मिला शतरंज के सुनहरे भविष्य को आगे बढ़ाने वाला खिलाड़ी



Posted Date: 09 Feb 2019

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9 फरवरी, 1993 को उतराखण्ड की सरज़मीं पर एक ऐसे खिलाड़ी का जन् हुआ जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का सिर ऊंचा कर दिया। हम बात कर रहे हैं भारत के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी परिमार्जन नेगी की। वे ग्रैंड मास्टर का खिताब जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी हैं।

परिमार्जन नेगी का जन्म प्रकृति के मनोरम दृश्यों से भरपूर देश के उत्तराखंड राज्य में हुआ था। उनकी शिक्षा एमिटी इंटरनेशनल स्कूल दिल्ली से संपन्न हुई और वर्तमान में वह एमिटी विश्वविद्यालय के ही छात्र हैं। उनके टैलेंट से दुनिया तब रुबरु हुई जब उन्होंने बहुत ही कम उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब जीत सबसे कम उम्र के भारतीय का रिकार्ड अपने नाम कर लिया।

केवल 4 वर्ष की उम्र में शतरंज का खेल शुरु करने वाले परिमार्जन ने जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरु कर दी। उन्होंने अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय सफलता 2002 में प्राप्त की जब तेहरान में वह 10 वर्ष से कम आयु वर्ग के एशियाई खिलाड़ियों के विजेता बने।

जुलाई 2005 में परिमार्जन नेगी विश्व के सबसे युवा इंटरनेशनल मास्टर बन गए। स्पेन के सार्ट में हुए इंटरनेशनल ओपन में उन्होंने अपना तीसरा व फाइनल आई एम नार्म अर्जित किया। 1 जुलाई 2006 को परिमार्जन आज तक के सबसे कम उम्र के दूसरे ग्रैंडमास्टर बने। उनके अलाव सर्जी कर्जाकिन उनसे भी कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए थे।

यह खिताब उन्होंने रुस में सत्का नामक स्थान पर चेल्याविंसक रीज़न सुपरफाइनल चैंपियनशिप में अपने तीसरे व फाइल जी.एम.नार्म के रुप में पाया। यह खिताब जीतने पर उन्होंने भारतीय खिलाड़ी पी. हरिकृष्णा का सबसे कम उम्र का ग्रैंड मास्टर होने का रिकार्ड तोड़ दिया।

मई 2007 में परिमार्जन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व युवा स्टार शतरंज टूर्नामेंट के पांचवे दौर में जूनियर चैंपियन जावे आंद्रियासियन को ड्रा पर रोक दिया। इससे परिमार्जन की संयुक्त बढ़त बन गई। इसके साथ ही देश को शतरंज में सुनहरे भविष्य को आगे बढ़ाने वाला एक सितारा मिल गया जिसके बेहतर प्रदर्शन की सभी कामना करते हैं।


BY : Saheefah Khan




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