राष्ट्रीय - RBI रिपोर्ट- अभी नहीं मिलेगी डूबे कर्ज की समस्या से निजात, 2018-19 में और बढ़ेगा NPA

RBI रिपोर्ट- अभी नहीं मिलेगी डूबे कर्ज की समस्या से निजात, 2018-19 में और बढ़ेगा NPA



Posted Date: 30 Jul 2018

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि बैंकों को अभी गैर NPA एनपीए की समस्या से निजात नहीं मिलने वाली। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष में बैंकों का डूबा कर्ज और बढ़ेगा।

रिज़र्व बैंक की 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग प्रणाली में मार्च, 2018 के अंत तक कुल एनपीए और पुनर्गठित क़र्ज़ कुल ऋण के 12.1 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एनपीए पर प्रावधान बढ़ने और बांड पर प्राप्ति बढ़ने की वजह से मार्क टू मार्केट (एमटीएम) ट्रेजरी नुकसान जैसे सामूहिक प्रभाव से बैंकों का मुनाफे पर असर हुआ है और शुद्ध रूप से उनको घाटा उठाना पड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) का कुल सकल एनपीए 31 मार्च, 2018 तक बढ़कर 10,35,528 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 31 मार्च, 2015 को 3,23,464 करोड़ रुपये था।

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क्या है एनपीए?बैंक का वो कर्ज जो डूब गया हो और जिसे फिर से वापस आने की उम्मीद नहीं के बराबर हो उसे एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) कहा जाता है। अमूमन अगर बैंक को कर्ज की ईएमआई 3 महीने पर नहीं आती है तो उस अकाउंट को एनपीए घोषित कर दिया जाता है। मुमकिन है कि उसमें से कुछ रकम वापस आ भी जाए। जून में खत्म हुई तिमाही में देश के बैंकों का करीब 8 लाख 30 हजार करोड़ रुपए डूबा हुआ था। दूसरे शब्दों में बैंकों का 10 फीसदी से ज्यादा कर्ज एनपीए है। अमेरिका और चीन में यह रेशियो 2 फीसदी से कम है। हां, कुछ देश ऐसे भी हैं जहां एनपीए की समस्या अपने देश से भी ज्यादा भयावह है।

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BY : ANKIT SINGH


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