राष्ट्रीय - RBI और UIDAI ने एयरटेल पेमेंट्स बैंक को e-KYC से नए ग्राहकों को लेने की अनुमति दी

RBI और UIDAI ने एयरटेल पेमेंट्स बैंक को e-KYC से नए ग्राहकों को लेने की अनुमति दी



Posted Date: 15 Jul 2018

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परेशानी शुरू होने के लगभग 10 महीने बाद, RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) और UIDAI (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया) ने एयरटेल और एयरटेल पेमेंट्स बैंक को आधार e-KYC का उपयोग कर नए ग्राहकों को ऑनबोर्ड करने की अनुमति दे दी है।

एयरटेल के एक प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए कहा, रिज़र्व बैंक ने एयरटेल पेमेंट्स बैंक को नए ग्राहकों को ऑनबोर्ड करने के लिए जरुरी अनुमोदन दे दिए हैं। UIDAI ने भी आधार e-KYC द्वारा एयरटेल पेमेंट्स बैंक को नए गरखाकों को ऑनबोर्ड करने की अनुमति दे दी है। एयरटेल इस अनुमोदन के लिए अधिकारीयों को धन्यवाद देता है।
हम सभी वित्तीय समावेश और बैंकिंग में सरकार के दृश्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं , एयरटेल प्रवक्ता ने कहा।

क्या गलत था एयरटेल और एयरटेल पेमेंट्स बैंक के साथ ?

सितम्बर 2017 में UIDAI ने पहली बार एयरटेल और एयरटेल पेमेंट्स बैंक को नोटिस भेजा की कंपनी बिना किसी सूचित सहमति के पेमेंट्स बैंक खतों को खोलने के लिए अपने ग्राहकों के आधार आधारित सिम सत्यापन का उपयोग कर रही है। उस समय दोनों संस्थाओं ने कहा कि खोले जा रहे बैंक खातों को नए मोबाइल कनेक्शन की इ-सत्यापन प्रक्रिया से डी-लिंक किया गया था।

तुरंत बाद, नवंबर 2017 में दूसरी नोटिस जारी हुई, जिसके बाद कंपनी ने कहा कि ग्राहकों की सहमति के बिना कोई भी नया पेमेंट्स बैंक खता नहीं खोला जा रहा था। कंपनी ने ग्राहकों की जानकारी की सुरक्षा और गोपनीयता की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किये जाने का आश्वासन दिया है।

15 दिसंबर, 2017 को जारी किए गए आदेश में निरंतर कई शिकायतें प्राप्त करने के बाद, UIDAI ने अस्थायी रूप से एयरटेल और एयरटेल पेमेंट्स बैंक को आधार का उपयोग कर ग्राहकों के e-KYC आयोजित करने से प्रतिबंधित कर दिया।

रिपोर्ट उस समय सामने आई जब 2.3 मिलियन एयरटेल ग्राहकों के बैंक खाते बनाए गए थे, इन खातों में 7.3 मिलियन डॉलर (INR 47 करोड़) स्थानांतरित किए जा चुके थे।

इसके अलावा, कई एयरटेल ग्राहकों ने यह भी शिकायत की कि कंपनी एलपीजी सब्सिडी को बिना उनकी अनुमति के इन खतों में पुनर्निर्देशित कर रही है।

यह भी सुझाव दिया गया था कि लगभग 4.7 मिलियन एलपीजी ग्राहकों के 26 मिलियन डॉलर (INR 167 करोड़) की सब्सिडी को इन खातों में उनके ज्ञान के बिना स्थानांतरित कर दिया गया था।

प्रतिबंध के साथ, एयरटेल अपने दूरसंचार ग्राहकों के ई-सत्यापन करने में सक्षम नहीं था और न ही अंतरिम अवधि के दौरान ग्राहकों के सिम को आधार से जोड़ने की अनुमति होगी।

इसके अतिरिक्त, भुगतान बैंक को आधार आधारित ईकेवाईसी का उपयोग करके नए खाते खोलने से रोक दिया गया था। हालांकि, यदि उपलब्ध हो तो यह वैकल्पिक तरीकों के माध्यम से बैंक खाते खोलने में सक्षम होगा।

डीबीटी सब्सिडी में 21.2 मिलियन डॉलर (आईएनआर 138 करोड़) का भुगतान करने के बाद, कंपनी को 10 जनवरी तक अपने दूरसंचार उपयोगकर्ताओं के आधार-आधारित ई-केवाईसी सत्यापन करने के लिए सशर्त मंजूरी दे दी गई थी।

BY : Sumit Das




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