विशेष - उस शख्स की कहानी जिसने बाॅलीवुड में बनाया मुकाम, दिए कभी न भूल पाने वाले यादगार सितारे

उस शख्स की कहानी जिसने बाॅलीवुड में बनाया मुकाम, दिए कभी न भूल पाने वाले यादगार सितारे



Posted Date: 30 Aug 2018

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सय्यद शौकत हुसैन रिज़वी एक पाकिस्तानी अभिनेता, फिल्म निर्माता और निर्देशक एवं संपादक थे। जो जुगनू (1947), जान-ए-बहार (1958) और जेनेट (1965) जैसी मशहूर फिल्मों के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें पाकिस्तानी फिल्म उद्योग के अग्रणी के रूप में जाना जाता है।

शौकत हुसैन रिज़वी का जन्म 1914 में उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ शहर में हुआ था। उन्होनें अपने कैरियर की शुरूआत कलकत्ता में एक सहायक प्रोजेक्शनिस्ट के रूप में की। इसके बाद उन्हें मदन थिएटर के संपादन विभाग में नौकरी मिली।

बता दें मदन थिएटर के एक शानदार यहूदी तकनीशियन एज्रा मीर ने एक बार उनका जिक्र करते हुए बताया था कि शौकत ने अंदर सीखने की ललक थी वो हमेशा ही कुछ नया करना चाहते थे। उन्होंने थिएटर में फिल्म निर्माण की बारीकियों को कायदे से सीखा।

उस दौरान फेमस फिल्म मेकर और प्रोडयूसर दलसुख एम. पंचोली की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने रिजवी को कलकत्ता से लाहौर बुला लिया। यहाँ पर रिजवी ने कुछ फिल्मों में एडिटिंग का काम किया। एडिटिंग में निपुण होने के बाद दलसुख ने उन्हें अपनी अगली फिल्म खानदान में डायरेक्टर के रूप में चुना।

शौकत रिजवी द्वारा निर्मित खानदान फिल्म 1941 में रिलीज़ हुई। ये उस समय के मशहूर फिल्मों में से एक थी जिसने प्राण और नूर जहां जैसे कलाकारों के लिए बॉलीवुड के रस्ते खोल दिए।

उस दौरान नूरजहां और रिजवी में प्यार हुआ और दोनों ने वर्ष 1943 में शादी कर ली। शादी के बाद दोनों ने कई मशहूर फिल्मो में एक साथ काम किया। जिसमे उन्हें सफलता मिली।

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1 9 47 में रिज़वी और नूरजहाँ अपने तीनों बच्चों के साथ पाकिस्तान चले गए। रिज़वी बॉम्बे से पाकिस्तान कैमरा लेकर गए थे और उस कैमरे को दिलीप कुमार, नूरजहाँ फिल्म जुगनू को शूट करने के लिए इस्तेमाल किया था। बाद में उनके बेटे ने इसे लिबर्टी मार्केट, सैलू में एक रेस्तरां के मालिक को दान दिया, जहां लॉबी में आगंतुक को निर्देश में रखा गया था।उनकी फ़िल्में निम्नलिखित हैं:

  • खंडन-1942

  • नौकर-1943

  • दोस्त-1944

  • जेनेट-1945

  • जुगनू-1947

  • चैनवी-1951 (एक पंजाबी भाषा पाकिस्तानी फिल्म)

  • गुलनार-1953

  • जान.ए.बहार-1958

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पाकिस्तान में रिज़वी और नूरजहाँ ने तीन साल तक ब्रेक लिया। उसके बाद उन्होंने पाकिस्तान में एक फिल्म स्टूडियो बनाया और अपने पहले पंजाबी फिल्म बनाना शुरू कियाए यह फिल्म एक विशाल सुपरहिट बन गई। 1999 को सय्यद शौकत हुसैन रिज़वी लाहौर में 85 साल की उम्र में निधन हो गया था।


BY : Abdul Mannan


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