अंतरराष्ट्रीय - UN ने ICC को सौंपी ‘रोहिंग्या नरसंहार’ की रिपोर्ट, सैन्य अधिकारियों पर चलेगा हत्या और यौन शोषण का मामला

UN ने ICC को सौंपी ‘रोहिंग्या नरसंहार’ की रिपोर्ट, सैन्य अधिकारियों पर चलेगा हत्या और यौन शोषण का मामला



Posted Date: 28 Aug 2018

17
View
         

न्यूयॉर्क। म्यांमार नासंहार मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अपनी एक रिपोर्ट इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को सौंप दी है। ये रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के फैक्ट फाइंडिंग मिशन के तहत तैयार की गई। रिपोर्ट में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या करने, उन्हें जेल में डालने और यौन शोषण कर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताया है। साथ ही इस बात की अपील की गई कि म्यांमार की सैन्य अधिकारियों पर लोगों के नरसंहार का केस चलाया जाए।

रिपोर्ट में इस बात को भी साफ किया गया है कि म्यांमार की मिलिट्री कभी भी लोगों को जान से मारने, महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने, बच्चों की हत्या करने और पूरे गांव को बर्बाद कर देने की सफाई नहीं दे सकती। रखाइन राज्य में म्यांमार सेना का ऐसा करना एक तरह से सुरक्षा के लिए खतरा है।

खबरों के मुताबिक़ संयुक्त राष्ट्र ने अपनी इस रिपोर्ट को हेग (नीदरलैंड) स्थित इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को सौंप दिया है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। रिपोर्ट में कमांडर इन चीफ सीनियर जनरल मिन आंग हलैंग समेत छह मिलिट्री अफसरों के नाम हैं।

मिशन का हिस्सा रहीं अफसर राधिका कुमारस्वामी ने सोमवार को बताया, "म्यांमार में अफसरों ने काफी गलतियां की हैं। वे हालात को नियंत्रित करने में नाकाम रहे। हमारे पास इस बात के सबूत हैं। हमने सारे नाम यूएन ह्यूमन राइट्स कमिश्नर जीद राद अल हुसैन को सौंप दिए हैं।''

वहीं रिपोर्ट में म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की सरकार की प्रमुख होने के बाद भी अपनी ताकत का इस्तेमाल नहीं कर पाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने नैतिक आधार के चलते भी रखाइन राज्य में हुई घटनाओं को रोकने की कोशिश नहीं की।

बता दें म्यांमार सेना के इस कदम के कारण करीब 6 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश चले गए। वहीं रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार अपना नागरिक नहीं मानता। सरकार उन्हें गैरकानूनी प्रवासी बांग्लादेशी मानते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगाती है।

 

संयुक्त राष्ट का कहना है कि म्यांमार में करीब 50 साल सैन्य शासन रहा। वहां मिलिट्री कमांडरों को पूरी ताकत हासिल है। सेना को सबकुछ करने की आजादी है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल और सेव द चिल्ड्रन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने यूएन की इस रिपोर्ट का समर्थन किया है।

वहीं म्यांमार आर्मी अपने ऊपर लगाए आरोपों से लगातार इनकार कर रही है। अफसरों का कहना है कि केवल रोहिंग्या आतंकियों को निशाना बनाया गया, जो अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी नामक आतंकी गुट से जुड़े हैं। इस गुट ने कई पुलिस चौकियों को निशाना बनाया था।

इसी मामले में व्यापक कदम उठाते हुए फेसबुक ने सोमवार को म्यांमार के सेना प्रमुख जनरल हलैंग और वहां के कई अन्य सैन्य अफसरों के अकाउंट बंद कर दिए।

फेसबुक का कहना है कि उनकी ओर से नफरत भरे भाषण और फेक न्यूज पोस्ट की जा रही थीं। यूनाइटेड नेशंस (यूएन) ने सोमवार को म्यांमार आर्मी के जनरल मिन आंग हलैंग समेत अन्य आला अफसरों को नरसंहारक कहा था।

यह भी पढ़ें : बिगड़ी इमेज सुधारने की कोशिश में फेसबुक, बैन किया ये ख़ास ऐप, 200 से अधिक टेम्परेरी ऑफ

फेसबुक ने बताया कि इन सैन्य अफसरों से संबंधित 18 फेसबुक अकाउंट, 52 फेसबुक पेज और एक इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक किया गया। साथ ही, उन पर पोस्ट किया गया डेटा और कंटेंट हटा दिया गया।

फेसबुक के मुताबिक, इन पेजों और अकाउंट्स को 1।20 करोड़ लोग फॉलो कर रहे थे। सोशल मीडिया कंपनी ने कहा कि हम ऐसे लोगों को रोकना चाहते हैं, जो हमारी सेवाओं का इस्तेमाल धार्मिक और जातिवादी विवादों को भड़काने में कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : ऑनलाइन गेमिंग टूर्नामेंट में मिली हार तो ताबड़तोड़ चलाई गोलियां, तीन की मौत, 11 घायल

बता दें पिछले साल अगस्त में लाखों रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार की सीमा पारकर बांग्लादेश में दाखिल हुए थे। वहां उन्होंने शरणार्थी कैंपों में पनाह ली थी।


BY : Ankit Rastogi


Loading...





Loading...
Loading...