विशेष - वाजिद खान : नेल आर्ट की अद्भुत कला से दुनिया को रुबरु कराने वाले कलाकार

वाजिद खान : नेल आर्ट की अद्भुत कला से दुनिया को रुबरु कराने वाले कलाकार



Posted Date: 10 Mar 2019

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देश के मशहूर आर्टिस्ट तथा नेल आर्ट के जनक वाजिद खान का जन्म 10 मार्च, 1981 में हुआ था। उन्होंने अपनी नेल आर्ट की कला से पूरे विश्व में भारत का नाम रौशन किया। नेल कला के अविष्कारक होने के कारण उन्होंने अपनी इस कला को पेटेंट भी करवा लिया ताकि कोई उनकी इस प्रतिभा को नकल न कर सके। इस कला के द्वारा उन्होंने मशहूर हस्तियों जैसे – फिल्म अभिनेता सलमान खान, महात्मा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और धीरुभाई अंबानी जैसी बड़ी हस्तियों के पोट्रेट बनाये हैं।

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के एक बेहद छोटे से गावं में जन्म लेने वाले वाजिद बचपन से ही चंचल स्वभाव और कलात्मक दृष्टि वाले बालक थे। बचपन से ही साधारण वस्तुओं से वे असाधारण प्रस्तुति देने की कोशिश करते थे। थोड़े और बड़े हुए तो कुछ अलग करने की चाह ने कला के क्षेत्र में कदम रखवाया। पढ़ाई के क्षेत्र में शुरु से लापरवाह थे और घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण पढ़ाई छोड़ने का फैसला ले लिया।

एक दिन घर से 1300 रुपये लेकर वह कुछ अलग करने की तलाश में निकल पड़े। कुछ दिनों बाद वह अहमदाबाद पहुंचे जहां पेंटिंग और इनोवेशन के काम में जुट गए। वहां वह रोबोट बनाते थे। यहीं पर उनके हुनर को पहचाना आई.आई.एम अहमदाबाद के प्रोफेसर अनिल गुप्ता ने। उन्होंने वाजिद 17500 रुपये देकर कहा तुम्हारी जगह यहां नहीं है। उनकी बात मानकर वाजिद खान आगे बढ़े और फिर बुलंदियां छूने से उन्हें कोई नहीं रोक पाया।

नेल आर्ट को पूरे विश्व में पहुंचाने का श्रेय वाजिद खान को दिया जा सकता है। उनके द्वारा निर्मित मां-बेटे का प्यार दिखाती नेल आर्ट की एक कलाकृति में उमड़ी भावनाओं ने दर्शकों को भावुक कर दिया था। कीलों से बने इन चेहरों की कशिश दिनोंदिन बढ़ती गई। इसकी प्रसिद्धि ने रफ्तार पकड़ ली और प्रदर्शनी का दौर शुरु हुआ। हालांकि जब किसी कलाकार की कला मुकम्मल कहलाने लगती है तो कलाकार को नया प्रयोग करने का खतरा उठाना ही पड़ता है।

वाजिद ने भी यह खतरा मोल लिया और 2012 में ऑटोमोबाइल आर्ट लांच कर दिया। बी.एम.डब्ल्यू, मर्सिडीज़ और बुलेट के पार्ट्स से यह ऑटोमोबाइल आर्ट तैयार किया गया था। उन्हें मिलाकर दीवार पर एक घोड़ा बनाया गया था जो दूर से देखने पर जॉकी के साथ दौड़ता हुआ नज़र आता है। इसके थ्री डी इफेक्ट्स आज भी इंदौर शहर के एक मशहूर बंगले की दीवार पर क़ायम हैं।

उन्होंने अपनी कला को सिर्फ लोगों को खुशी देने या अपने जज़्बात ज़ाहिर करने का ज़रिया नहीं बनाया बल्कि समाज को जागरुक करने में भी अहम भूमिका निभाई। 2014 में बेटी बचाओ आंदोलन में शामिल हुए और चिकित्सा के क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणो से रोती हुई एक मासूम बच्ची की कलाकृति बनाई। जिसमें यह दर्शाया गया है कि जो कैंची लोगों के ज़ख्मों को सिलने के काम आती है, जो स्टेथेस्कोप दिल की धड़कने नापता है अकसर वही किसी मासूम को दुनिया में आने से पहले मौत के मुंह में पहुंचा देती है।

उनकी अद्भुत कला के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्डस, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स, इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स, एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज हो चुका है। वह देश के इकलौते ऐसे महान कलाकार हैं जिन्हें आयरन नेल आर्ट और मेडिकल इक्विपमेंट आर्ट के लिए पेटेंट प्राप्त है।

साल 2022 में कतर में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में उन्हें 10000 स्कवेयर फीट की एक कलाकृति बनाने का आर्डर मिला है। जिसके लिए उन्हें 200 करोड़ रुपए मिलेंगे यह स्कल्पचर दुनिया का सबसे बड़ा स्कल्पचर होगा और वाजिद इसके लिए मिलने वाले सारे पैसे यानि 200 करोड़ दान में देने वाले हैं।


BY : Saheefah Khan




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