विशेष - उस्ताद ज़ाकिर हुसैन : विश्व में देश का नाम रौशन करने वाले मशहूर तबला वादक

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन : विश्व में देश का नाम रौशन करने वाले मशहूर तबला वादक



Posted Date: 09 Mar 2019

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9 मार्च, 1951 को जन्में उस्ताद ज़ाकिर हुसैन देश के मशहूर तबला वादक हैं। उन्हें तबला वादन की प्रतिभा अपने पिता कुरैशी अल्लाह रक्खा खान से विरासत में मिली। क्योंकि अल्ला रक्खा खान भी तबला वादन के लिए पूरे विश्व में मशहूर थें। इसी कारण ज़ाकिर को भी बचपन से अपनी प्रतिभा को तराशने का मौका मिल गया और वह आगे चलकर पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो गये।

12 साल की उम्र से ही उन्होंने संगीत की दुनिया में अपने तबले की आवाज़ का जादू बिखेरना शुरु कर दिया था। 1973 में उनका पहला एलबम लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड आया था जिसके बाद कामयाबी उनके कदम चूमती चली गयी और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी ख़्याति देश के साथ ही पूरे विश्व में दूर दूर तक होने लगी और वह तबला वादन की दुनिया के बेताज बादशाह बन गए।

1991 में उनका प्लेनेट ड्रम एलबम रिलीज़ हुआ जो इतना प्रसिद्ध हुआ कि 1992 में उन्हें बेस्ट म्यूज़िक एलबम के लिए ग्रैमी अवार्ड से नवाज़ा गया। उस समय इस क्षेत्र में ग्रैमी पुरस्कार पाने वाले वह पहले भारतीय थे। मलयालम फिल्म वनाप्रस्थं के लिए उन्होंने एक संगीतकार, कार्यकर्ता और भारतीय संगीत सलाहकार के रुप में भी काम किया था। सन् 2000 में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और नेशनल फिल्म फेस्टिवल में उन्हें ग्रैंड जूरी पुरस्कार मिला।

इसके अलावा उन्होंने काफी फिल्मों में एकल संगीत और विविध बैंड के साथ भी संगीत दिया है। बहुत सी फिल्मों में गाने भी गाए हैं और तबले की धुन का प्रयोग लिटिल बुद्धा जैसी कई फिल्मों में भी किया है। उनके संगीत और तबला वादन के क्षेत्र में अद्भुत प्रयोगों को देखते हुए 2005 में प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी ने उन्हें म्यूज़िक डिपार्टमेंट में प्रोफेसर के रुप में नियुक्त किया। इसके अलावा स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर भी ज़ाकिर हुसैन ने काम किया। वर्तमान में वह सेन फ्रांसिस्को में रह रहे हैं।

उनके संगीत कला के क्षेत्र में विशेष योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1988 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाज़ा। उस समय उनकी आयु मात्र 37 वर्ष थी और यह पुरस्कार पाने वाले वह सबसे कम उम्र के भारतीय थे। इसके बाद 2002 में उन्हें पद्म भूषण से भी नवाज़ा गया।


BY : Saheefah Khan




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