विशेष - प्रियंका या फिर दूसरी इंदिरा गांधी...कांग्रेस की नाउम्मीदियों को दूर करने की एक ही आशा?

प्रियंका या फिर दूसरी इंदिरा गांधी...कांग्रेस की नाउम्मीदियों को दूर करने की एक ही आशा?



Posted Date: 09 Feb 2019

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‘माना चौतरफ नाउम्मीदियां ही हावी हैं, पर फिर भी मेरे यार उम्मीद अभी बाकी है...’ इन लाइनों को पढ़कर और अपने दैनिक जीवन में अमल में लाकर कोई भी सफल हो सकता है लेकिन इन दिनों यह लाइन दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की राजनीति में मुख्य विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस पर सटीक बैठती है। वह इसलिए क्योंकि एक तरफ जहां राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान तो सौंप दी गई लेकिन उसका कुछ खास असर देखने को नहीं मिला। वहीं दूसरी ओर जब से प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी में मुख्य भूमिका में उतारा गया है। उसके बाद से ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के चेहरे खिले हुए हैं और वह उनमें पूर्व प्रधाममंत्री इंदिरा गांधी की छवि भी देख रहे हैं।

किसी भी चुनावी पार्टी को लोकतंत्र के महापर्व यानी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उसके कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना जरूरी होता है। क्योंकि कार्यकर्ता ही क्षेत्र में पार्टी के विस्तार और उसकी लोकप्रियता के निर्धारण का काम काफी हद तक तय करते हैं। वहीं जब से प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस में मुख्य भूमिका में उतारकर महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। उसके बाद से ही पार्टी कार्यकर्ताओं के चेहरे खिले हुए हैं।

दिख रही है दादी की छवि

कार्यकर्ताओं के खुश होने के पीछे दो कारण हैं। पहला यह कि कांग्रेस पार्टी में जवाहर लाल नेहरू के बाद से महिलाओं का नेतृत्व ही सफल रहा है। फिर चाहे बात इंदिरा गांधी की हो या फिर सोनिया गांधी की। वहीं इस खुशी का दूसरा कारण यह है कि प्रियंका गांधी वाड्रा में लोग उनकी दादी की छवि यानी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छवि देख रहे हैं। यह मात्र दिखावे और रंग-रूप पर ही निर्भर नहीं करता है। बल्कि इसके पीछे प्रियंका गांधी वाड्रा का शांत और सरल स्वभाव, गंभीर व्यक्तित्व और किसी भी मामले पर सोच समझकर निर्णय लेने की क्षमता आदि सभी पर आधारित है... ऐसा पार्टी के कार्यकर्ताओं का मानना है।

विरासत में मिला दादी का यह मुख्य गुण

लोग इंदिरा गांधी को राजनीति में इतना निपुण इसलिए मानते हैं, क्योंकि वह काफी कम उम्र से ही अपने पिता यानी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साथ रहते हुए राजनीति को गहराई से समझने लगीं थीं। ठीक वैसे ही प्रियंका गांधी वाड्रा भी सक्रिय राजनीति में भले ही न रही हों लेकिन एक राजनीतिक परिवार से होने के नाते वह हर मामले में वैसी ही दिलचस्पी दिखाती हैं, जैसा कि उनकी दादी दिखाती थीं।

इंदिरा गांधी ने मरने से पहले प्रियंका के लिए कही थी यह बात

प्रियंका गांधी वाड्रा को सक्रिय राजनीति में आने में भले ही काफी लंबा वक्त लग गया हो लेकिन आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी मौत से पहले यह कहा था कि प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाना चाहिए। इंदिरा गांधी ने यह बात तब कही थी, जब प्रियंका की उम्र मजह 12 साल थी। उनकी इस बात से तो यही लगता था कि दादी को इस बात का अंदाजा पहले ही हो गया था कि उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम प्रियंका गांधी ही बखूबी कर सकती हैं। यही कारण है कि जब आज प्रियंका गांधी साड़ी पहन कर निकलती हैं और अपनी दादी जैसी ही हेयरस्टाइल में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचती हैं तो पार्टी के लोगों को उनमें इंदिरा गांधी की ही छवि दिखाई देती है।

16 साल में ही दिया था पहला भाषण

प्रियंका गांधी देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं, शायद यही वजह थी कि उन्हें खुलकर बोलने का हुनर विरासत में मिला था। जिसके चलते उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में ही अपनी जिंदगी का पहला भाषण दिया था। उस समय वह दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में पढ़ रही थीं। इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के जीसस एंड मैरी स्कूल से पूरी की। हालांकि उन्होंने अपनी यह पढ़ाई घर से ही पूरी की थी, क्योंकि इंदिरा गांधी की मौत के बाद गांधी परिवार पर संकट के बादल मंडरा रहे थे और सुरक्षा की दृष्टि से उनके घरवालों ने घर से ही उनकी पढ़ाई पूरी करवाई।

आंख, नाक और हेयरस्टाइल समेत पहनावा भी है दादी जैसा

पार्टी के ही कार्यकर्ताओं और कई दिग्गज नेताओं ने पूर्व में कई बार यह कहा है कि प्रियंका गांधी को एक बार देखने से लगता है कि वह अपनी माता सोनिया गांधी और पिता राजीव गांधी जैसी तो नहीं लेकिन अपनी दादी इंदिरा गांधी के ज्यादा करीब दिखती हैं। क्योंकि उनका साड़ी पहनने का ढंग, उनकी आंख, उनकी नाक और उनकी हेयरस्टाइल हूबहू उनकी दादी जैसी ही दिखती है। बाकी अब जो उन्होंने राजनीति में कदम रख ही दिया है, तो जल्द ही उनकी यह काबिलियत भी देश के सामने निखर कर आएगी। 2014 में सत्ता से बेदखल हुई कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को अब यही लगता है कि शायद प्रियंका ही एक बार फिर से पार्टी की टूटी हुई कमर को ठीक करने का काम करेंगी और एक बार फिर हर तरफ कांग्रेस के पंजे वाला ही झंडा नजर आएगा।


BY : Akhilesh Tiwari




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