लाइफस्टाइल - इस चीज का रोज़ करें सेवन, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर...

इस चीज का रोज़ करें सेवन, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर...



Posted Date: 09 Mar 2019

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इन दिनों आम लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत मोटापा बन चुका है. ऐसा मान ले कि आधे से ज्यादा जनता इसकी शिकार है. आपको बता दें कि खान-पान इसका मुख्य कारण है. सब अपनी लाइफ में इतना बिजी हो गए है, किसी को टाइम पर खाना याद ही नही रहता और बाकी सब बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते है. लेकिन मोटापा ही नही, मोटापे से होने वाली कई बीमारियां है जो आपके लये खतरनाक साबित हो सकती है. लेकिन अगर इन बिमारियों से निजात चाहते है, तो अपनी आदतों में राई को शामिल करें.

वैसे घरों में राई का इस्तेमाल अचार बनाने या फिर कुछ सब्ज‍ियों और सांभर में तड़का लगाने के लिए किया जाता है. राई एक अनाज है जिससमें प्रोटीन होता है. राई सिर्फ स्वाद ही नहीं वजन कम करने और डायबिटीक पैशेंट के लिए भी यह काफी बढ़िया मानी जाती है.

वजन कम करने में मददगार

राई का शरीर के वजन पर काफी हद तक प्रभाव पड़ता है, यह वजन बढ़ने से रोकता है और मोटापे के खतरे को कम करता है. राई इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करती है और कुल प्लाज्मा कोलेस्ट्रॉल को कम करती है. सुबह और दोपहर में राई की रोटी का सेवन करने से गेहूं की रोटी की तुलना में भूख का स्तर कम हो जाता है क्योंकि राई की रोटी में चोकर की मात्रा सबसे अधिक होती है.

डायबिटीज पर कंट्रोल

राई का एक और लाभ यह है कि यह ब्लड शुगर के स्तर को नियमित और बेहतर बनाने में मदद करता है. राई की रोटी ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित करने और इंसुलिन गतिविधि में सुधार करने में असरदार है.

कैंसर से बचाव

साबुत अनाज राई में कैंसर से लड़ने वाले गुण होते हैं जिसमें घुलनशील और अघुलनशील फाइबर, फाइटिक एसिड, प्रतिरोधी स्टार्च, पॉलीफेनोल्स, सैपोनिन और प्रोटीज अवरोधक जैसे तत्‍व होते हैं. ये सभी कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकने में मदद करते हैं. राई के आटे से बने राई उत्पाद ब्रैस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में मददगार होते हैं.

हार्ट प्रॉब्लम करें दूर

राई सहित साबुत अनाज आपके दिल के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे होते हैं क्योंकि इनमें उच्च मात्रा में फाइटोन्यूट्रिएंट्स और फाइबर होते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग रोजाना राई से बने तीन खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, उनमें हृदय रोग का खतरा 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक कम होता है।


BY : Srishti Gautam




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