मनोरंजन - अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : बॉलीवुड की वो चुनिंदा अभिनेत्रियां जिन्होंने दी हिंदी सिनेमा को अलग पहचान

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : बॉलीवुड की वो चुनिंदा अभिनेत्रियां जिन्होंने दी हिंदी सिनेमा को अलग पहचान



Posted Date: 08 Mar 2019

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मुंबई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रुप में मनाया जाता है। ऐसे में बॉलीवुड की उन अदाकारओं को कैसे भूला जा सकता है जिन्होंने अपनी अदाकारी के बल पर गौरवशाली महिलाओं के रुप में समाज में अलग पहचान बनायी और बाकी महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनीं। साथ ही पुरुष प्रधान समाज में अपने दम पर फिल्मों को हिट कराने का श्रेय हासिल किया। तो आज बात करते हैं बॉलीवुड की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों की जिन्होंने हिंदी सिनेमा को नई पहचान दी।

हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार मधुबाला का फिल्म मुग़ले आज़म में निभाया गया अनारकली का किरदार आज भी लोगों को याद है। उनकी कमाल की अदाकारी ने लोगों को उनका दीवाना बना दिया था। उसके बाद बॉलीवुड में दर्जनों अच्छी से अच्छी फिल्में बनीं लेकिन उनका अनारकली का किरदार हमेशा के लिए अमर हो गया जिसकी आज तक कोई बराबरी नहीं कर सका।

बेहतरीन अदाकारा मीना कुमारी का जादू भारतीय सिनेमा जगत पर बत्तीस बरसों तक छाया रहा। आंखों में बसे दर्द ने उन्हें ट्रेजडी क्वीन का खिताब दिलाया तो अभिनय की ऊंचाई के दम पर वो भारतीय फिल्मों की पाक़ीज़ा कहलाईं। जब-जब भारतीय फिल्मों का इतिहास लिखा जाएगा, पाकीज़ा का ज़िक्र ज़रुर होगा।

करीब चार दशक तक हिंदी सिनेमा को आवारा, श्री420, बरसात, अंदाज़, दीदार, चोरी-चोरी, मदर इंडिया जैसी एक से बढ़कर एक फिल्में देने वाली अभिनेत्री नरगिस दत्त ने सिर्फ 14 साल की उम्र में फिल्मों में अपना डेब्यू किया था। मदर इंडिया में नरगिस द्वारा निभाया गया किरदार इतना फेमस हो गया कि फिल्म ऑस्कर के लिए नामित हो गई।

श्रीदेवी ने अपनी दिलकश अदाओं और चुलबुले अंदाज़ से सबके दिलों में एक ख़ास जगह बना ली। साल 1983 में आई फिल्म सदमा से श्रीदेवी ने बॉलीवुड में डेब्यू किया। श्रीदेवी की सफलता के पीछे हिम्मतवाला फिल्म का सबसे बड़ा हाथ है। हिम्मतवाला फिल्म ने ही श्रीदेवी को घर घर में फेमस कर दिया था। साल 1997 में फिल्म जुदाई के बाद से श्रीदेवी 15 सालों के लिए फिल्मों से गायब हो गईं और फिर नज़र आईं साल 2012 में फिल्म इंग्लिश-विंगलिश में। यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई। उसके बाद उनकी आखिरी फिल्म आयी मॉम जिससे श्रीदेवी ने साबित कर दिया की वह सेंकड पारी भी खेलने को तैयार हैं।

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द डर्टी पिक्चर, कहानी, इश्किया, तुम्हारी सुलु और बेगम जान जैसी सशक्त किरदार वाली फिल्में कर विद्या बालन ने भी यह साबित कर दिया कि एक अभिनेत्री फिल्मों में केवल शोपीस के लिए नहीं होती बल्कि वह भी अपनी अदाकारी से फिल्म को हिट कराने का दम रखती है।

मणिकर्णिका से डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत अपनी बेबाक छवि के लिए भी शोहरत बटोर चुकी हैं। हर मुद्दे पर खुलकर बोलने वाली कंगना ने अपने साहस के दम पर यह दिखा दिया कि महिलाएं शोषण पर चुप नहीं बैठ सकतीं फिर चाहे वह बॉलीवुड ही क्यों न हो।

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BY : Saheefah Khan




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