राष्ट्रीय - सरकारी कर्मचारियों की हुई बल्ले-बल्ले, मोदी सरकार ने चुनाव से पहले बदला 27 साल पुराना यह नियम

सरकारी कर्मचारियों की हुई बल्ले-बल्ले, मोदी सरकार ने चुनाव से पहले बदला 27 साल पुराना यह नियम



Posted Date: 09 Feb 2019

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नई दिल्ली। मोदी सरकार ने आगमी लोकसभा चुनाव से पहले ही केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। इसका फायदा उसे आने वाले लोकसभा चुनाव में भी हो सकता है। दरअसल केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके म्यूचुअल फंड और शेयरों में निवेश की लिमिट बढ़ा दी है। जिसकी वजह से अब केंद्रीय कर्मचारी पहले की अपेक्षा ज्यादा निवेश कर सकेंगे। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह लिमिट बढ़ाकर उनके छह माह के मूल वेतन के बराबर कर दी गई है।

इस फैसले के साथ ही मोदी सरकार ने 27 साल पहले की मौद्रिक सीमा के नियम को भी बदल डाला है। बीते गुरुवार को इस बारे में केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई। जिसके बाद अब केंद्रीय कर्मचारियों के चेहरे खिल सकते हैं। इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार ने सभी विभागों को आदेश भी जारी कर दिया है। वहीं इससे पहले सरकारी कर्मचारियों के लिए निवेश के नियम दूसरे थे।

पुराने नियम के मुताबिक ग्रुप ए और ग्रुप बी के अधिकारियों को शेयर, डिबेंचर और म्यूचुअल फंडों में एक कैलेंडर साल में केवल 50000 तक या इससे कम का ही लेनदेन करना होता था। इससे अधिक होने पर उन्हें इसका ब्यौरा देना होता था। वहीं ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 25000 थी। लेकिन अब नए नियम के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारी छह माह के मूल वेतन के बराबर निवेश कर सकेंगे।

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दरअसल सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद यह नियम अमल में आया है। क्योंकि सातवें वेतन आयोग के लागू होने से केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में उनके निवेश की लिमिट में भी सरकार ने बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि इन सभी लेनदेन पर प्रशासनिक अधिकारी नजर रख सकें, इसके लिए सरकार ने कर्मचारियों को ब्योरा साझा करने का प्रारूप भी जारी किया है।

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BY : Akhilesh Tiwari




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