राजनीति - के. राजशेखरन ने छोड़ा मिजोरम का राज्यपाल पद, प्रबल हुए सक्रिय राजनीति में दोबारा एंट्री के आसार

के. राजशेखरन ने छोड़ा मिजोरम का राज्यपाल पद, प्रबल हुए सक्रिय राजनीति में दोबारा एंट्री के आसार



Posted Date: 08 Mar 2019

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नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनावों से पहले मिजोरम के राज्यपाल के. राजशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद उनके द्वारा उठाये गए इस कदम के  कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की माने तो आशंका जताई जा रही है कि आम चुनावों के मद्देनज़र के. राजशेखरन को जानबूझ कर राज्यपाल के पद से अलग किया गया है। ताकि उन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर के खिलाफ चुनावों में खड़ा किया जा सके।

बता दें के. राजशेखरन को मई 2018 में मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया था। उनके इस्तीफे के बाद असम के राज्यपाल जगदीश मुखी मिजोरम के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।

खबरों के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई राजशेखरन को तिरुवनंतपुरम से शशि थरूर के खिलाफ उम्मीदवार बनाना चाहती है। इसके लिए भाजपा की केरल इकाई ने पार्टी लीडरशिप से बातचीत भी की थी। इस बातचीत के बाद ही राजशेखरन का इस्तीफा आया।

ऐसे में कहा जा रहा है कि पार्टी उन्हें कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर के खिलाफ तिरुवनंतपुरम सीट से लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बना सकती है।

वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि अगर भारतीय जनता पार्टी के.राजशेखरन को वापस सक्रिय राजनीति में बुलाती है तो दूसरे राज्यों के राज्यपाल भी इस तरह की मांग कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला भी वापस सक्रिय राजनीति में लौटना चाहते हैं। उन्होंने भी ऐसी इच्छा जताई है।

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बता दें के. राजशेखरन संघ विचारधारा से आते हैं। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे हैं। 2015 में उन्हें केरल का भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था। वह तीन सालों तक केरल के भाजपा अध्यक्ष रहे और इसके बाद उन्हें मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

यह भी कहा जा रहा है कि संघ राजशेखरन को फिर से केरल में वापस बुलाना चाहता था। दो हफ्ते पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने राजशेखरन को केरल वापस भुलाने का मुद्दा उठाया गया था। अमित शाह के सामने संघ के प्रतिनिधियों ने राजशेखरन को वापस सूबे में बुलाने की मांग की थी।

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BY : Ankit Rastogi




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