राष्ट्रीय - मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांडः क्या 34 बच्चियों की लुटी अस्मत से बढ़कर है राज्य सरकार की विश्वसनीयता..?

मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांडः क्या 34 बच्चियों की लुटी अस्मत से बढ़कर है राज्य सरकार की विश्वसनीयता..?



Posted Date: 27 Aug 2018

20
View
         

मीडिया की समाज में काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मीडिया को लोकतांत्रिक व्यवस्था का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी जिम्मेदारी देश और लोगों की समस्याओं को सामने लाने के साथ-साथ सरकार के कामकाज पर नजर रखना भी है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में मीडिया की कार्यप्रणाली और रुख पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सवाल यह है कि क्या मीडिया बदल रहा है? क्या मीडिया के नैतिक पक्ष पर ऐसे सवाल जायज हैं?

देश में घट रहे हालिया माहौल को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि मीडिया के पर नोचने की कोशिश की जा रही। 23 अगस्त को पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले पर सभी मीडिया घरानों को तथ्यों के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को फटकारते हुए कहा था कि राज्य सरकार की विश्वसनीयता दांव पर लगी हुई है। साफ जाहिर होता है कि राज्य के अस्तित्व को बचाने की साख में मीडिया रिपोर्टिंग को हासिये पर रखा जा रहा।

रिपोर्टिंग पर कोर्ट की ओर से रोक लगाए जाने के बाद ये यह मुद्दा चर्चा में है। हाल ही में एंडडीटीवी के एंकर रविश कुमार ने भी इसपर टिप्पड़ी की उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि इस मामले में कोर्ट से लेकर बिहार सरकार को मीडिया का शुक्रगुज़ार होना चाहिए। मीडिया की ख़बरों के कारण ही एक कबीना मंत्री को पद से हटना पड़ा और सीबआई ने उनके यहां भी छापेमारी की।

अगर मीडिया न होता यह कांड सीबीआई के दरवाज़े तक नहीं पहुंचता। शायद अदालत के दरवाज़े तक भी नहीं। कोर्ट को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए था कि मीडिया की वजह से ही यह जघन्य अपराध सामने आया है। एक कैंपस में 30 से अधिक बच्चियों का बलात्कार और उनके साथ यौन अत्याचार सामान्य घटना नहीं है। बल्कि बाद में जब बाकी मीडिया की सक्रियता बढ़ी तब और भी कुछ नए तथ्य सामने आते गए।

वहीँ इस मामले में पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह ने तर्क देते हुए कहा कि इससे आरोपियों को अग्रिम रूप से लाभ मिलने की आशंका रहती हैं।

सोचने वाली बात है कि इस भयावय मामले की भनक सरकार के आला अधिकारीयों को भी को न थी! सालों से उन 34 बच्चियों पर हो रहे दुष्कर्म की चीख तब किसी को नहीं सुनाई दी। बिहार ही नहीं देश की राजनीति को गरमा देने वाले इस मामले को मीडिया ने ही उजागर किया..लेकिन अंत में सच से सरोकार कराने वाले मीडिया को ही कटघरे में रखा गया। सोचने वाली बात है..

आप भी सोचिए.. क्या आप ये नहीं जानना चाहते कि बालगृह में उन 34 बच्चियों के रेप के मामले में क्या हुआ?


BY : ANKIT SINGH


Loading...





Loading...
Loading...