विशेष - ‘दिल के तमाम ज़ख़्म तेरी हां से भर गए...’ : प्रेम का कवि या बागी राजनेता, कौन हैं कुमार विश्वास?

‘दिल के तमाम ज़ख़्म तेरी हां से भर गए...’ : प्रेम का कवि या बागी राजनेता, कौन हैं कुमार विश्वास?



Posted Date: 10 Feb 2019

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डॉ कुमार विश्वास या विश्वास कुमार शर्मा दोनों ही नाम एक ही व्यक्तित्व की पहचान हैं। देश के सबसे लोकप्रिय कवियों में से एक, देश के सबसे मंहगे और व्यस्त कवियों में से एक कुमार विश्वास खुद को सिर्फ एक बेहतर कवि के रूप में परिचित कराते हैं जबकि सार्वजनिक जीवन में ऐसी कई पहचानें हैं जिनसे कुमार विश्वास राब्ता रखते भी हैं और नहीं भी।

शैक्षिक जीवन के शुरूआती दिनों में एक भावी इंजीनियर, एक प्रेमी, करियर के शुरूआती दिनों में एक प्रोफेसर, एक आंदोलनकारी, एक राजनैतिक पार्टी का स्टार प्रचारक, एक संघर्षशील राजनेता, जो अब बागी है, 2014 लोकसभा चुनाव में एक राजनैतिक पार्टी का अमेठी से उम्मीदवार, एक पूर्वभावी राज्यसभा का सांसद जो पद से वंचित रह गया या शायद कर दिया गया, राजनीति का शिकार और प्रेम का एक कवि। कवि एक ऐसी पहचान है जिसे कुमार हंसकर स्वीकार करते हैं क्योंकि जीवन की इन सभी परिस्थितियों में एक कवि उनका भरपूर साथ देता है और सतत् रूप से साथ चलता रहता है।

रोडवेज की बस से जब आप दिल्ली पहुंचेंगे तो गढ़मुक्तेश्वर और गाजियाबाद के बीच एक कस्बा पड़ता है, नाम है पिलखुआ। कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी 1970 को पिलखुआ में हुआ था। बसंत पंचमी के दिन पैदा हुए कुमार बचपन से लेकर आजतक चंचल स्वभाव और कुशाग्र बुद्धि के हैं, जिसकी कई बार इन्हें हानि होती है और कई बार लाभ। हांलांकि अपने कवि कुल में वरिष्ठ होने के साथ कुमार के व्यक्तित्व में अब गंभीरता आ रही है।

कुमार विश्वास के पिता चंद्रपाल शर्मा आर. एस. एस. डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर थे और माता रमा शर्मा एक गृहणी थीं। अपने माता-पिता के चार लड़कों और एक लड़की के बीच कुमार सबसे छोटे बेटे थे। पहले लाला गंगा सहाय स्कूल फिर राजपुताना रेजीमेंट इंटर कॉलेज फिर मोतीलाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, कुमार का शैक्षिक जीवन किसी तरह विज्ञान की पढ़ाई करते हुए रेंग रहा था। लेकिन अपने पिता के विरुद्ध जाकर कुमार ने इंजीनियरिंग छोड़ी और साहित्य की पढ़ाई की, जिसमें आज वो शीर्ष डिग्री पी.एचडी होल्डर हैं।

शुरूआती कवि जीवन  और पी. एचडी. के दौरान बहन की सलाह पर कुमार ने अपना नाम बदलकर विश्वास कुमार शर्मा से कुमार विश्वास रख लिया। कवि सम्मेलनों में अपनी पहचान बना रहे कुमार 1994 में राजस्थान के लाला लाजपत राय कॉलेज में हिंदी साहित्य के लेक्चरर के पद पर नियुक्त हुए। बाद में 2012 में अन्ना आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

कुमार ने एक कवि के रूप में काफी संघर्ष किया। शुरूआती दिनों में जहां कवि सम्मेलन के मंच उर्दू यानी मुस्लिम और हिंदी यानी हिंदू खेमे में बंटे हुए थे, कुमार ने दोनों मंचों को मिलाने का काम किया। कुमार ने उर्दू मुशायरे में एक संचालक के तौर पर हिंदी के बड़े कवियों, जैसे गोपालदास ‘नीरज’, को बुलाने का काम किया और हिंदी के कवि सम्मेलनों में उर्दू के बड़े शायरों को शामिल करने का काम किया। इसका विरोध भी हुआ, मंच से राम मंदिर बनाने वाले कवि हों या बाबरी मस्जिद पर मातम करने वाले शायर सभी इसके विरोध में थे लेकिन ये फॉर्मूला काम कर गया।

चुटकियों के पीछे उबासी लेती कविता को आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों तक पहुंचाने का काम कुमार विश्वास ने ही किया। कुमार ने कवि सम्मेलनों को कॉन्सर्ट का रूप दिया और खुद कवि सम्मेलनों के रॉकस्टार कह लाए। आज ‘द कुमार विश्वास शो’ या ‘केवी नाइट्स’ जैसे कार्यक्रम कुमार विश्वास को स्टार बनाते हैं और इन कार्यक्रमों के मंहगे टिकट ही कारण हैं कि कुमार विश्वास आज सबसे अधिक टैक्स देने वाले कवि हैं।

कुमार की पत्नी मंजू शर्मा भूगोल की प्रोफेसर हैं और इनकी दो बेटियां हैं, अगरता विश्वास और कुहू विश्वास। कुमार के विरोधी भी उनकी वाकपटुता के कायल हैं। पूरी दुनिया में कविताएं पढ़ने वाले कुमार, राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आयोजन में कविता पढ़ने वाले कुमार, लाखों में अपनी फीस लेने वाले कुमार, देश के सबसे बड़े न्यूज़ चैनल पर खुद का एक प्रोग्राम करने वाले कुमार आज भी इतने लोकप्रिय इसलिए हैं क्योंकि वो दुबई में भी ‘कोई दीवाना गाते हैं’ और धौलपुर में भी, वो नाइजीरिया में भी ‘तिरंगा’ गाते हैं और बलिया में भी। ज़मीन से जुड़ा एक कवि, एक बागी राजनेता को और एक विद्वान वक्ता कुमार विश्वास जानने और पढ़ने के लिए वास्तव में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। कुमार विश्वास को हमारी ओर से जन्मदिन की अशेष-विशेष शुभकामनाएं।


BY : Yogesh




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