राष्ट्रीय - नोटबंदी के पूरे हुए दो साल, सरकार पर हमलावर विपक्ष कर रहा माफी की मांग

नोटबंदी के पूरे हुए दो साल, सरकार पर हमलावर विपक्ष कर रहा माफी की मांग



Posted Date: 08 Nov 2018

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नई दिल्ली। 8 नवंबर 2016 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे टीवी पर आकर 500-1000 नोटों को अवैध घोषित कर दिया। अचानक हुई इस नोटबंदी से देश सकते में गया। हर तरफ अफरा-तफरी और तैयारियों के अभाव में जनता ने कई मुश्किलों का सामना किया। कभी इस नोटबंदी को कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग कहा गया तो कभी आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई।

आम जनता स्थिति सामान्य होने तक बैंक की लाइनों के बाहर परेशान होती दिखी। किसी की बेटी की शादी रुक गई तो किसी किसान की फसल का पैसा फंस गया। हाल ही में आई आरबीआई की रिपोर्ट में सामने आया कि नोटबंदी के बाद प्रचलन में सारा पैसा वापस आ गया। जिसपर विपक्ष ने सवाल उठाया कि अगर पैसा वापस आ ही गया तो नोटबंदी की ज़रूरत ही क्या था और काला धन कहां गया।

नोटबंदी सफल हुई या असफल इसका फैसला जनता आगामी लोकसभा चुनाव में करेगी। विपक्ष सवाल उठाता रहा कि क्या नोटबंदी अपने उद्देश्य से भटक गई? जिन पर कालेधन का शक था वो बैंक की लाइनों में क्यों नहीं दिखे? अगर नोटबंदी इतनी ही आवश्यक थी और सफल हुई तो क्या कालाधन और भ्रष्टाचार खत्न हो गया? क्या आतंकवादियों और नक्सलवादियों को होने वाली फंडिग रुक गई? अगर 1000 के नोट से कालाधन जमा हो सकता है तो 2000 के नोट से ये कैसे रुका?

इन्हीं सवालों के साथ नोटबंदी के दो साल पूरे हो गए हैं। आज दूसरी वर्षगांठ पर विपक्ष इस दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में मना रहा है और सरकार पर हमला बोलते हुए एक के बाद एक विपक्षी नेता ट्वीट कर रहे हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने वर्तमान अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के लिए नोटबंदी को जिम्मेदार ठहराया है।

मनमोहन सिंह ने कहा, “नोटबंदी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो कहर बरपा, वह अब सबके सामने है। नोटबंदी ने हर व्यक्ति को प्रभावित किया, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, पेशा या संप्रदाय का हो। अक्सर कहा जाता है कि वक्त सभी जख्मों को भर देता है लेकिन नोटबंदी के जख्म-दिन-ब दिन और गहराते होते जा रहे हैं।”

पूर्व पीएम ने कहा, “नोटबंदी से जीडीपी में गिरावट तो दर्ज हुई ही, उसके और भी असर देखे जा रहे हैं। छोटे और मंझले धंधे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं जिसे नोटबंदी ने पूरी तरह से तोड़ दिया। अर्थव्यवस्था लगातार जूझती जान पड़ रही है जिसका बुरा असर रोजगार पर पड़ रहा है। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रहीं। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए जाने वाले कर्ज और बैंकों की गैर-वित्तीय सेवाओं पर भी काफी बुरा असर पड़ा है। नोटबंदी के कारण रुपए का स्तर गिरा है जिससे मैक्रो-इकोनॉमी भी काफी प्रभावित हुई है।”

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक ट्वीट कर नोटबंदी की 'कीमत' समझाई है। थरूर ने इस दिन को आपदा बताते हुए #DemonetisationDisasterDay के नाम से ट्वीट किया है। थरूर के मुताबिक, नोटबंदी के कारण नए नोट छापने पर 8 हजार करोड़ रुपए का खर्च आया, 15 लाख लोगों की नौकरी गई, 100 लोग जान से हाथ धो बैठे और जीडीपी में डेढ़ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट कर सरकार पर हमला बोला, “हम ऐसा कतई नहीं करेंगे क्योंकि हम सभ्य हैं। नरेंद्र मोदी को 730 दिन बाद भी ऐसा नहीं लगता कि 8 बजे रात तक देश के लोगों से माफी मांग सकें। यह ऐसी घटना है जिसमें 100 लोगों की मौत हो गई।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर नोटबंदी 'घोटाले' के जरिए राष्ट्र के साथ धोखा करने को लेकर निशाना साधा। नोटबंदी के दिन को ‘काला दिवस’ करार देते हुए बनर्जी ने ट्वीट कर कहा, "सरकार ने इस बड़े नोटबंदी घोटाले से हमारे देश के साथ धोखा किया है।"

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उन्होंने कहा, "इसने अर्थव्यवस्था और लाखों जिंदगियों को तबाह कर दिया। जिन लोगों ने ऐसा किया है लोग उन्हें दंडित करेंगे। नोटबंदी आपदा की आज 'डार्कडे' दूसरी वर्षगांठ है। जिस क्षण इसकी घोषणा हुई तब भी मैंने ऐसा ही कहा था। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, आम लोग और विशेषज्ञ अब सभी सहमत हैं।"

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एआईएमआईएम नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नोटबंदी को लेकर ट्वीट में लिखा कि, “नरेंद्र मोदी की संवेदनहीनता ने लाखों लोगों की जिंदगी और देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी। 2019 में वो (मोदी) हमें नोटबंदी भूलने के लिए कहेंगे, ठीक वैसे ही जैसे गुजरात 2002 के दंगे भूलने की बात कही थी लेकिन हम भूले नहीं।”


BY : Yogesh mishra


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