राजनीति - कमज़ोर दिल वाले बीजेपी विरोधी न देखें ये सर्वे, लग सकता है झटका

कमज़ोर दिल वाले बीजेपी विरोधी न देखें ये सर्वे, लग सकता है झटका



Posted Date: 10 Feb 2019

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लखनऊ। चुनाव का मतलब प्री-पोल सर्वे, पॉपुलैरिटी सर्वे, कुछ राष्ट्रीय सर्वे तो कुछ पार्टियों के आंतरिक सर्वे। ये सर्वे चुनाव तय तो नहीं करते पर कई बार मतदाताओं का मूड भांपने का काम तो करते ही हैं। ऐसा ही एक पॉपुलैरिटी टाइप सर्वे किया है इंडिया टुडे और एक्सिस माई इंडिया ने देश के सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में, जिसके नतीजे यहां नीचे देखिए।

यह सर्वे उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 8442 जनता के 29 जनवरी से 6 फरवरी के बीच किया गया है। इसमें पीएम मोदी की लोकप्रियता के बारे में पाया गया कि दिसंबर 2018 में जहां पीएम मोदी 51 प्रतिशत लोगों की पसंद थे, जो फरवरी 2019 में बढ़कर 52 प्रतिशत हो गया।

बात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की करें तो दिसंबर 2018 में जहां इनकी लोकप्रियता 26 प्रतिशत थी, जो फरवरी 2019 में बढ़कर 31 प्रतिशत गई। बसपा सुप्रीमो मायावती की लोकप्रियता का ग्राफ गिरा है। दिसंबर 2018 में उनकी लोकप्रियता का प्रतिशत जहां 11 प्रतिशत थी, वह फरवरी 2019 में गिरकर 8 प्रतिशत तक पहुंच गई।

सर्वे में जनता से केंद्र सरकार के कामकाज के बारे में पूछा गया तो पता चला कि सितंबर 2018 में जहां 53 प्रतिशत लोग केंद्र सरकार से संतुष्ट थे। वहीं, फरवरी 2019 में यह प्रतिशत बढ़कर 54 पहुंच चुका है। वहीं, असंतुष्टों की संख्या सितंबर 2018 में 28 प्रतिशत थी, अब बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई। ठीक-ठाक बताने वालों की संख्या 16 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत हो गई है।

हांलांकि यह प्रश्न बहुत जल्दबाज़ी वाला था लेकिन उत्तर प्रदेश का अगला सीएम पूछने पर अधिकतर लोगों ने योगी आदित्यनाथ का ही नाम लिया। अगले सीएम के लिए योगी का नाम लेने वालों की संख्या दिसंबर 2018 में 38 प्रतिशत थी, जो फरवरी 2019 में बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई।

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दिसंबर 2018 में 37 प्रतिशत लोगों की पसंद अखिलेश यादव थे, जो फरवरी 2019 में घटकर 33 प्रतिशत हो गया। इस दौरान मायावती का प्रतिशत घटकर 15 से 14 हो गया है। राजनाथ सिंह को यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में जहां दिसंबर 2018 में 6 प्रतिशत लोग देखना चाहते थे, अब उनकी संख्या घटकर 3 प्रतिशत हो गई है।

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उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के कामकाज से सितंबर 2018 में 41 प्रतिशत लोग संतुष्ट थे, जिनकी संख्या फरवरी में बढ़कर 42 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, अंतुष्टों की संख्या भी 37 से बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई है। ठीक-ठाक कहने वालों की संख्या 20 से घटकर 15 प्रतिशत हो गई है। साथ ही सर्वे में पूछा गया कि प्रियंका गांधी के राजनीति में सक्रीय होने से किसे अधिक नुकसान होगा? इस पर 56 प्रतिशत लोगों ने सपा-बसपा का नाम लिया, 31 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी कहा, 31 प्रतिशत लोगों ने कोई राय नहीं दी। प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस को फायदा होगा? यह पूछे जाने पर 27 प्रतिशत लोगों ने ‘हां’ और 57 फीसद लोगों ने ‘न’ कहा।


BY : Yogesh




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