विशेष - कुछ सफर कट गया लेकिन बहुत अभी बाकी है, स्वच्छ भारत अभियान का अभी सफल होना बाकी है...

कुछ सफर कट गया लेकिन बहुत अभी बाकी है, स्वच्छ भारत अभियान का अभी सफल होना बाकी है...



Posted Date: 11 Feb 2019

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मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर, लोग मिलते गए और कारवां बनता गया... शायद इन चंद लाइनों को ही अपने जहन में रखकर हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में सत्ता बनाने के साथ एक ऐसे अभियान की शुरुआत की थी, जिसके जरिए दुनिया में भारत की छवि  एक अलग छवि बनाई जा सके। इस अभियान की शुरुआत उन्होंने 2 अक्टूबर 2014 को की थी, जिसका नाम है... “स्वच्छ भारत अभियान”। हमारे प्रधानमंत्री ने इस अभियान की शुरुआत करते हुए यह भी कहा था कि आपने अपने लिए प्रधानमंत्री नहीं बल्कि एक प्रधान सेवक चुना है।

उनकी अपने आप को प्रधानसेवक कहने की बात इसलिए भी और ज्यादा सटीक लगती है, क्योंकि अगर आप किसी काम को दूसरों से अच्छी तरीके से करवा सकते हैं, तो इसके लिए पहले आपको ही शुरुआत करनी होगी और ऐसा ही हमारे प्रधानमंत्री ने भी किया। उन्होंने अभियान की शुरुआत करने के साथ ही हाथों में झाड़ू लेकर दिल्ली की सड़कों पर जागरुकता अभियान चलाया। जिसके चलते लोग भी इस अभियान में साथ आते गए और इसका व्यापक असर भी देखने को मिला।

लेकिन आज इस अभियान को शुरु हुए चार साल से भी ज्यादा का समय हो चुका है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि हम वर्तमान में कहां खड़े हैं, क्या वाकई यह अभियान अपना असर दिखाने में कारगर रहा है... क्या वाकई यह अभियान भारत की एक अलग छवि दुनिया के सामने रखने में सफल रहा है... क्या वाकई पीएम मोदी का वह सपना पूरा हुआ, जिस भारत की कल्पना उन्होंने पांच साल बाद की थी..?

बात स्वच्छता अभियान की हो ही रही है तो हम देखते हैं कि ऐसे ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने आते हैं, जो अपने कर्मों से समाज के लिए मिसाल पेश करते हैं, और लोगों को जागरुक करने का काम करते हैं। इस कड़ी में एक नाम है मध्यप्रदेश के भोपाल में रहने वाले युवा डॉक्टर अभिनीत गुप्ता का। जिनको उनके पिता द्वारा लगभग एक साल पहले वेलेंटाइन डे के दिन ही 70 लाख रुपए की एक बेशकीमती कार गिफ्ट की गई थी। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अन्य बेटा अन्य बेटों की तरह नहीं था।

अभिनीत गुप्ता की सोच आपको हैरान भी करेगी और उनका नेक काम जानने के बाद आप उन्हें सैल्यूट किए बिना रह भी नहीं पाएंगे। दरअसल अभिनीत गुप्ता पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान से काफी ज्यादा प्रभावित हैं और उन्होंने अपनी 70 लाख रुपए की बेशकीमती गाड़ी से शहर का कचरा उठाने का काम शुरू किया। जिससे वह लोगों में इस मिशन के तहत जागरुकता पैदा कर सकें। उनके इस काम में उनकी फैमिली भी उनका पूरा सहयोग करती है।

स्वच्छ भारत अभियान में इसने लगाए चार चांद

देश में स्वच्छ भारत अभियान के तहत ही भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाने का निर्णय भी लिया गया था। जिसके लिए 2 अक्टूबर 2019 के समय को टार्गेट बनाया गया था। बताते चलें कि भारत में आज भी 62.6 करोड़ लोगों की आबादी खुले में शौच करती है। वहीं इस आबादी को घटाकर शून्य करने का लक्ष्य सरकार ने 2014 में तय किया था। इन शौचालयों के निर्माण को लेकर ही कुछ समय पूर्व एक आंकड़ा जारी किया गया था। जिसमें बताया गया था कि 1974 से लेकर 2014 के बीच जहां 6.5 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया था, जबकि 2014 से 2018 के बीच कुल 7.25 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। वहीं देश का स्वच्छता कवरेज भी पूर्व की अपेक्षा बढ़कर 2014 से 2018 के बीच 83.71 प्रतिशत रहा। बताते चलें कि 2017 के एक आंकड़े के मुताबिक अभी तक देश के कुल 1,58,957 गांवों को खुले से शौच से मुक्त कर दिया गया है।

इनका भी रहा खास योगदान

पीएम मोदी के इस अभियान को कागज से जमीनी हकीकत पर उतारने में देश के कॉर्पोरेट जगत ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पीएम मोदी के बुलावे पर एलएनटी, डीएलएफ, वेदांता, भारती, टीसीएस, अंबुजा सीमेंट, टोयोटा किरलोस्कर, मारुती, टाटा मोटर्स, कोका कोला, डॉबर, आदित्य बिड़ला ग्रुप, अदानी, इनफोसिस और टीवीएस जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों ने भागीदारी निभाई। एक आंकड़े के मुताबिक कॉर्पोरेट जगत के शामिल होने के कारण ही 1000 करोड़ लागत की कीमत वाले कई स्वच्छता परियोजनाएं तैयार होने की कगार पर हैं।

स्वच्छ भारत अभियान को शुरु करते हुए पीएम मोदी ने एक बात यह भी कही थी कि अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर यानी 2 अक्टूबर 2019 में इस लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा। जिसके लिए प्रतिवर्ष हर एक इंसान को 100 घंटे का श्रमदान करना होगा। एक साल में 100 घंटे का मतलब तो यह होता है कि अगर हम अपने रोज के जीवन में कुछ मिनट भी निकाल लें तो यह लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाएगा लेकिन आज भी पीएम मोदी के इस अभियान से अनभिज्ञ बनने का प्रयास करते हैं और चाहकर भी अपने घर यानी देश की सफाई में हाथ नहीं गंदे करना चाहते हैं। लेकिन अगर कहा जाएग कि मध्य प्रदेश का यह युवा डॉक्टर अपने पिता द्वारा दिए गए गिफ्ट यानी अपनी 70 लाख रुपए की कार से शहर की गंदगी को साफ कर सकता है तो हम क्या प्लास्टिक बैग के जरिए ही इस प्लास्टिक के कचरे और अन्य गंदगी से भारत को मुक्त नहीं कर सकते हैं। पीएम मोदी के इस अभियान को ध्यान में रखते हुए और सभी की सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए इस असाधारण से लगने वाले लक्ष्य को पूरा करने के लेकर एक ही लाइन जहन में आती है और वह ये है कि कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों...।


BY : Akhilesh Tiwari




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