विशेष - कमजोर कड़ी... जो ‘जमील’ जैसे न जाने कितनों को दहशत के खूनी खेल का सिपहसलार बना देती है!

कमजोर कड़ी... जो ‘जमील’ जैसे न जाने कितनों को दहशत के खूनी खेल का सिपहसलार बना देती है!



Posted Date: 10 Feb 2019

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महाराष्ट्र के बीड़ जिले में मोबाइल फोन रिपेयर करने वाला एक शख्स जमील अंसारी (बदला हुआ नाम) समाज के लिए एक सीख भी है और हिदायत भी। ये बताता है कि आतंक और दहशतगर्दी के पथ पर लोगों को किस तरह से खींचा जा रहा है। धर्म के नाम पर किस तरह से लोग इस दलदल का शिकार हो रहे हैं। कहानी शुरू होती है दो साल पहले। जब 35 साल के स्नातक अंसारी की 2016 में सेल्समैन की नौकरी चली गई थी।

नौकरी जाने के बाद वह अपना काफी समय ऑनलाइन बिताने लग गया था, जहां वह आईएस के कुछ लोगों के संपर्क में आया और जल्द ही कट्टर बन गया।

बताया जाता है कि जमील ही अकेला नहीं था, जो आईएस के चंगुल में फंसा, बल्कि ये फेहरिस्त इतनी लंबी है जिसे बयान नहीं किया जा सकता।

इसके पीछे की असल वजह को टटोला गया तो हकीकत जो मिली वह काफी हैरान करने वाली थी। बताया जाता है कि बेरोजगारी एक ऐसा कारण है, जिसे दूर करने का सपना दिखाकर ही आईएस जैसे आतंकी संगठन मासूमो को अपना शिकार बनाते हैं।

ये तो भला हो उन अधिकारियों का जिन्होंने उसे सही राह दिखा कर फिर से मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। नतीजन आज वह एक मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है।

दरअसल एटीएस धार्मिक नेताओं और मौलवियों की मदद से ऐसे लोगों को फिर से मुख्यधारा में लाने के लिए एक कार्यक्रम चलाती है, जिसमें उनकी काउंसिलिंग की जाती है।

मराठावाड़ा में एटीएस ने पिछले दो साल में ऐसे 400 लोगों की पहचान की जिनके आईएस के प्रभाव में होने का संदेह था।

आज जमील को देखकर कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि महज दो साल पहले वह हजारों किलोमीटर दूर इराक जाकर खूंखार आतंकवादी संगठन आईएस में शामिल होने वाला था।

एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वह अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं है। महाराष्ट्र में कई युवक खासतौर से पिछड़े क्षेत्र के युवक आईएस के जाल में फंस चुके थे, लेकिन अब वह रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम की मदद से सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले साल इन संस्थानों में ऐसे 239 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। तीस लोगों को प्रशिक्षण दिये जाने के बाद उन्हें अपना खुद का धंधा शुरू करने के लिए बैंक से कर्ज भी मिला

अधिकारी ने बताया, ''जमील की ऑनलाइन गतिविधियां उसे जांच के दायरे में लेकर आई।'' एटीएस के अधिकारियों ने पाया कि अंसारी आईएस के प्रोपेगैंडा में फंस गया जिसके बाद उसकी काउंसिलिंग की गई।

अधिकारी ने बताया कि जब किसी व्यक्ति को कट्टरपंथी बना दिया जाता तो फिर उसे आईईडी या अन्य हथियार बनाना सिखाया जाता। कुछ को इराक में आईएस में शामिल होने के लिए भी उकसाया जाता। गौरतलब है कि एटीएस ने पिछले महीने औरंगाबाद और ठाणे जिलों से रासायनिक हमले करने के आरोप में नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।

एटीएस प्रमुख अतुलचंद्रा कुलकर्णी ने बताया कि उन्हें महसूस हुआ कि मुस्लिम समुदाय के ऐसे लोगों के लिए मुख्य समस्या बेरोजगारी है, जिससे वे ऑनलाइन कट्टर बन रहे हैं और आईएस के चंगुल में फंस रहे हैं।

कुलकर्णी ने कहा, ''बड़ी चुनौती ऐसे लोगों का जीवन फिर से पटरी पर लाना होता है और हमने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ग्रामीण स्व रोजगार प्रशिक्षण संस्थानों में इसका समाधान पाया।''


BY : Ankit Rastogi




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