आजमगढ़ - मौसम के बदलते हुए तेवर से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ा, मौसम विभाग ने किया किसानों को सचेत

मौसम के बदलते हुए तेवर से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ा, मौसम विभाग ने किया किसानों को सचेत



Posted Date: 09 Feb 2019

5445
View
         

आज़मगढ़। भारत के पहाड़ी इलाके भारी बर्फबारी की चपेट में हैं, जिसकी वजह से मैदानी क्षेत्रों में भी ठंड ने अपना असर बढ़ा दिया है। जिसका सबसे अधिक असर फसलों पर पड़ने वाला है जिसके लिए जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता ने किसानों को सचेत किया है। बूंदा बादी होने के कारण गेहूं में पीली गेरूई और आलू की फसल में नमी आ जाने के कारण अगैती व पिछैती झुलसा और सरसों की फसल में माहू कीट लगने की आशंका बढ़ गई है।

उन्होंने बताया कि गेहूं में पीली गेरूई रोग के लक्षण पत्तियों पर पीले रंग की धारी के रूप में दिखाई देते हैं। लक्षण दिखाई देने पर प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 200 मिली मात्रा को 250-300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। दूसरा छिड़काव 10-15 दिन के अंतराल पर करें।

यह भी पढ़ें.. कैफी की कैफियत को विशेष पहचान दिलाने मेजवां पहुंचे नसीरुद्दीन शाह, गांव वालों ने किया ज़ोरदार स्वागत

आलू की फसल में अगैती एवं पछैती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों पर भूरे एवं काले रंग के धब्बे बनते हैं। रोग के प्रकोप की स्थिति में कॉपरऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी एक किग्रा या मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 0.8 किग्रा या जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 0.8 प्रतिशत में से किसी एक को 250-300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

रसायन का छिड़काव वर्षा और कोहरे की स्थिति में न करें। राई और सरसों फसल में माहू कीट के प्रकोप होने की आशंका होती है। यदि कीट का प्रकोप पांच फीसदी से अधिक हो तो क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी एक लीटर या डायमेथोएट 30 ईसी एक लीटर या मिथाइल ओडेमीटान 25 ईसी एक लीटर में से किसी एक का प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

यह भी पढ़ें.. 11 फरवरी से शुरु हो रही मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं, नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए शासन ने कसी कमर


BY : Saheefah Khan




Loading...




Loading...